
दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण: मरीजों की संख्या बढ़ी, सरकारी गाड़ियों पर रोक नहीं
दिल्ली, 21 दिसंबर 2024: दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर हो चुकी है। बढ़ते प्रदूषण के कारण लोग सांस लेने में तकलीफ और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। अस्पतालों में खांसी, जुकाम, और श्वसन संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है।
प्रदूषण के चलते शहर की हवा जहरीली हो गई है। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, और गुरुग्राम जैसे इलाकों में दिन के समय भी धुंध छाई रहती है। लोग अपने घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जबकि कई लोग साफ हवा की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं।
सरकारी गाड़ियों पर कोई रोक नहीं
दिल्ली में प्रदूषण का एक बड़ा कारण सरकारी और सार्वजनिक वाहनों का प्रदूषण है। कई पुरानी सरकारी गाड़ियां अभी भी सड़कों पर दौड़ रही हैं, जो भारी मात्रा में काले धुएं का उत्सर्जन कर रही हैं। इसके बावजूद इन पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है।
ट्रांसपोर्ट की पुरानी बसें और अन्य वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण बढ़ा रहा है। प्रशासन छोटे और निजी वाहनों पर तो चालान कर रहा है, लेकिन बड़े वाहनों और सरकारी गाड़ियों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे।
प्रदूषण नियंत्रण में प्रशासन की विफलता
प्रशासन की लापरवाही इस समस्या को और गंभीर बना रही है। न तो सरकारी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया गया है और न ही पुरानी बसों की जगह नए वाहन लाए गए हैं। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदमों की कमी साफ नजर आती है।
स्वास्थ्य पर बुरा असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण के कारण हृदय रोग, श्वसन समस्याएं, और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर से लोग अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हो रहे हैं।
प्रदूषण के खिलाफ सख्त कदमों की मांग
दिल्ली के लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि बड़े वाहनों और सरकारी गाड़ियों पर रोक लगाई जाए। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। यदि जल्द ही प्रभावी नीतियां लागू नहीं की गईं, तो यह समस्या और विकराल हो सकती है।
दिल्ली की इस गंभीर स्थिति ने एक बार फिर से वायु प्रदूषण के खिलाफ सख्त और प्रभावी नीतियों की जरूरत को उजागर किया है।