
मध्य प्रदेश: कॉन्स्टेबल से अरबपति तक का सफर, भ्रष्टाचार की गहराईयों का पर्दाफाश
भोपाल, 21 दिसंबर 2024:
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार की गंगोत्री का एक और मामला सामने आया है। एक साधारण कॉन्स्टेबल, जिसकी मासिक वेतन 45-50 हजार रुपए थी, महज कुछ सालों में अरबपति बन गया। हाल ही में लोकायुक्त की कार्रवाई में इस पूर्व कॉन्स्टेबल के घर से 52 किलो सोना और करोड़ों रुपए नकद बरामद हुए। सवाल उठता है कि क्या यह सब एक कॉन्स्टेबल की क्षमता के भीतर है? यह मामला मध्य प्रदेश में फैलते भ्रष्टाचार का एक नमूना बन गया है।
बड़े नेताओं और अफसरों का संरक्षण
भोपाल के पावर कॉरिडोर में चर्चा है कि पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा को कुछ बड़े नेताओं और अफसरों का समर्थन प्राप्त था। उसने नाकों पर वसूली और दलाली के जरिए काली कमाई की। यही पैसा उसने रियल एस्टेट में निवेश किया। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व कॉन्स्टेबल ने परिवहन विभाग में काम करते हुए चेक पोस्ट पर अवैध वसूली से करोड़ों रुपए कमाए। जब उसके रहन-सहन में बदलाव आया, तब उस पर शक गहराने लगा।
जंगल में कार से मिला सोना और नकद
हाल ही में भोपाल के जंगल में एक लावारिस कार से 52 किलो सोना और भारी मात्रा में नकद बरामद किया गया। कार पूर्व कॉन्स्टेबल के दोस्त चेतन सिंह गौर की थी। गाड़ी पर हूटर और आरटीओ का बोर्ड लगा था, जो कथित तौर पर उनके प्रभावशाली संपर्कों की ओर इशारा करता है।
बिल्डर, नेता और अफसरों के गठजोड़ पर छापेमारी
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार सिर्फ कॉन्स्टेबल तक सीमित नहीं है। हाल ही में एक और मामले में लोकायुक्त ने बिल्डरों, नेताओं और अफसरों पर छापेमारी की। इस दौरान 6 करोड़ से अधिक नकद बरामद हुआ। इसमें बाइपास की जमीन खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी के आरोप भी जुड़े हैं।
छोटी मछलियों पर कार्रवाई, बड़ी मछलियां अछूती
लोकायुक्त की कार्रवाई अक्सर छोटे कर्मचारियों तक सीमित रहती है। हाल ही में जबलपुर में एसडीएम के ड्राइवर को रिश्वत लेते पकड़ा गया, लेकिन एसडीएम पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह, मैहर, धार और जबलपुर में तीन अन्य छोटे कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया, लेकिन भ्रष्टाचार की बड़ी मछलियां अब भी सुरक्षित हैं।
कैग रिपोर्ट में भी भ्रष्टाचार का खुलासा
हाल ही में आई कैग रिपोर्ट ने भी मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार की पोल खोली। इसमें 38 मीट्रिक टन अमान्य राशन वितरण और फर्जी परिवहन खर्च जैसे घोटालों का उल्लेख किया गया है।
मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की कार्रवाई भ्रष्टाचारियों के खिलाफ उम्मीद की किरण जरूर है, लेकिन जब तक बड़े नेताओं और अफसरों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह लड़ाई अधूरी रहेगी।