
दिल्ली 14 जनवरी: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है। इस चुनाव में दिल्ली के मुस्लिम वोटर निर्णायक साबित हो सकते हैं, क्योंकि उनकी एकजुटता का हमेशा चुनाव परिणामों पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है। दिल्ली में लगभग 21 लाख मुस्लिम वोटर हैं और लगभग 10-12 मुस्लिम बहुल इलाके हैं, जिनका चुनाव परिणामों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
2020 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने इन छह सीटों पर जीत हासिल की थी।
इन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में खास तौर पर सीलमपुर, मटिया महल, ओखला, मुस्तफाबाद, बल्लीमारान, और बाबरपुर सीटें हैं, जहां मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2020 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने इन छह सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके अलावा, बावना, जामिया नगर, और शहदरा जैसी सीटों पर भी मुस्लिम समुदाय का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
दिल्ली में मुस्लिम वोटरों की भूमिका हमेशा से अहम रही है। आमतौर पर मुस्लिम वोटर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, और अन्य छोटे दलों को समर्थन देते रहे हैं, जबकि भाजपा के लिए मुस्लिम वोटर कोर वोटर नहीं माने जाते। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में भाजपा के चुनावी प्रदर्शन में वृद्धि देखी गई है, और मुस्लिम समुदाय के वोटिंग पैटर्न में भी बदलाव आया है।
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्रों में मुस्लिम समुदाय के हितों का ध्यान रखने का वादा किया है।
दिल्ली चुनावों में आप, कांग्रेस और अन्य छोटे दल मुस्लिम वोटरों को आकर्षित करने के लिए विशेष रणनीतियां अपना रहे हैं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्रों में मुस्लिम समुदाय के हितों का ध्यान रखने का वादा किया है। आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि उसने मुस्लिम समुदाय के लिए कई योजनाओं को लागू किया है, जो उनकी भलाई के लिए थीं।
इस बार चुनावी परिदृश्य में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी सक्रिय है और मैदान में है। AIMIM के चुनावी मैदान में उतरने से मुस्लिम वोटों के बंटने की संभावना है, जो कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों के वोट शेयर को प्रभावित कर सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली के मुस्लिम वोटर किस पार्टी का समर्थन करते हैं और इसका चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ता है।
इन तमाम सियासी दांव-पेंच और मुस्लिम वोटर्स की अहम भूमिका के कारण, इस बार दिल्ली का चुनावी परिदृश्य काफी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।