
कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह
प्रयागराज, 14 जनवरी:
महाकुंभ 2025 की शुरुआत हो चुकी है, और संगम पर डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु देशभर से पहुंचे हैं। इस महाकुंभ में विदेशों से भी श्रद्धालु हिस्सा लेने के लिए आ रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता जा रहा है। कुंभ मेला क्षेत्र को दिव्य सजावट और भव्य तैयारियों के साथ सजाया गया है, जो इसे और भी आकर्षक बना रहा है।
महाकुंभ के पहले अमृत स्नान के अवसर पर किन्नर अखाड़े के संतों ने रथों पर सवार होकर संगम तट पर पहुंचकर पवित्र स्नान किया। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा, “आज हम संगम तीर्थ पर हैं। यह महाकुंभ 2025 का पहला अमृत स्नान है, और हमें बहुत खुशी है कि हमें अमृत स्नान में भाग लेने का मौका मिला। हम सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।”
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने अमृत स्नान किया
इसके बाद, जूना अखाड़े के संतों ने भी मकर संक्रांति के मौके पर अमृत स्नान के लिए संगम तट पर पहुंचकर पवित्र स्नान किया। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने भी इस अवसर पर अमृत स्नान किया और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया।
श्रद्धालुओं ने भगवान से पुण्य और मोक्ष की कामना की।
इस विशेष अवसर पर, महाकुंभ का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और उत्सवपूर्ण था, जिसमें विभिन्न अखाड़ों के संतों और भक्तों ने भाग लिया। संगम तट पर स्नान करने के बाद, श्रद्धालुओं ने भगवान से पुण्य और मोक्ष की कामना की।
महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए लाखों श्रद्धालु संगम पर पहुंच रहे हैं, और इस दौरान वे पूजा-अर्चना, ध्यान और साधना भी कर रहे हैं। महाकुंभ 2025 के पहले अमृत स्नान के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने संगम के पवित्र पानी में स्नान किया और इस धार्मिक महासंयोग का हिस्सा बने।
प्रशासन की ओर से वीआईपी दर्शन का प्रबंध किया जाएगा
कालभैरव मंदिर के प्रधान पुजारी मोहित महाराज ने बताया कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ ही मंदिर की ओर से भी दर्शन के लिए तैयारियां पूरी की गई हैं। प्रशासन की ओर से वीआईपी दर्शन का प्रबंध किया जाएगा, जबकि आम श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध दर्शन होंगे। शीतला मंदिर के उप महंत कल्लू महाराज ने बताया कि गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों में कतारबद्ध दर्शन करवाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही, विशालाक्षी, मंगला गौरी, गौरी केदारेश्वर जैसे प्रमुख मंदिरों में भी दर्शन के लिए सुदृढ़ व्यवस्थाएं की गई हैं, क्योंकि महाकुंभ के 45 दिनों के दौरान वहां प्रतिदिन 15 लाख से अधिक श्रद्धालु आने की संभावना है।