
केंद्र सरकार की वक्फ बोर्ड को लेकर बड़ी तैयारी:
नई दिल्ली, 15 जनवरी 2025 – देश में वक्फ बोर्ड को लेकर राजनीति तेज हो गई है, लेकिन अब केंद्र सरकार एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेने जा रही है। इस फैसले के तहत वक्फ बोर्ड की सारी संपत्तियाँ राज्य सरकारों के पास होंगी, और अब किसी एक व्यक्ति या समाज को वक्फ बोर्ड की संपत्ति का मालिकाना हक नहीं मिलेगा। इस निर्णय से वक्फ बोर्ड की जमीनों पर नियंत्रण के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा।
अब तक वक्फ बोर्ड की भूमि को कुछ समाज अपने स्वामित्व में मानते थे और उसे धार्मिक संस्थाओं के निर्माण के लिए उपयोग करते थे। लेकिन अब केंद्र सरकार के इस नए कदम के बाद, वक्फ बोर्ड की सभी भूमि पर राज्य सरकारों का हक होगा। केंद्रीय सरकार ने यह फैसला लिया है कि वक्फ बोर्ड की सभी संपत्तियाँ केंद्र और राज्य सरकारों के नियंत्रण में आ जाएँगी।
नए कानून का मसौदा
केंद्र सरकार जल्द ही एक नया कानून लाएगी जिसके अनुसार वक्फ बोर्ड की सारी भूमि राज्य सरकारों के पास होगी और राज्य सरकारें ही इस भूमि का उपयोग तय करेंगी। इससे राज्य सरकारों को वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर अधिक अधिकार मिलेगा। इस कानून के तहत राज्य सरकारों को वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी भी लेनी पड़ेगी।
वक्फ बोर्ड की भूमि पर नियंत्रण
केंद्र सरकार का यह कदम उन समुदायों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, जो वक्फ बोर्ड की भूमि को अपने समुदाय का स्वामित्व मानते हैं और उसे धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह निर्णय खास तौर पर उस समाज के लिए है, जो वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को खुद के नियंत्रण में मानते थे और उसे किसी अन्य के द्वारा हस्तक्षेप किए बिना इस्तेमाल करते थे।
केंद्र सरकार का कहना है कि यह कदम वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के सही उपयोग, सुरक्षा और देखरेख के लिए जरूरी है। केंद्र और राज्य सरकारें इन संपत्तियों पर निगरानी रख सकेंगी ताकि इसका दुरुपयोग न हो।
राज्य सरकारों का बढ़ेगा दखल
वहीं, जैसे हिंदू समाज के मंदिरों और धार्मिक स्थलों की संपत्तियाँ राज्य और केंद्र सरकारों के पास हैं, ठीक उसी तरह अब वक्फ बोर्ड की भूमि पर भी राज्य और केंद्र सरकार का हक होगा। इस कदम को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के नेतृत्व में लोकसभा में यह चर्चा की गई कि अगर धार्मिक संस्थाओं पर राज्य और केंद्र सरकार का हक है, तो वक्फ बोर्ड की भूमि पर भी सरकारों का नियंत्रण होना चाहिए।
विरोध और गुस्से का माहौल
इस फैसले के बाद वक्फ बोर्ड की भूमि पर नियंत्रण को लेकर समाज के कुछ हिस्सों में नाराजगी देखी जा रही है। वक्फ बोर्ड के समर्थक यह मानते हैं कि अब उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर केंद्र और राज्य सरकारों का अधिक दबाव होगा। उन्हें लगता है कि यह कदम उनके धार्मिक मामलों में सरकार की दखलंदाजी को बढ़ा सकता है।
केंद्र सरकार का कहना है कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियाँ अब सही तरीके से प्रबंधित की जाएँगी और इसका दुरुपयोग नहीं होगा। सरकार का उद्देश्य इन संपत्तियों को सुरक्षित रखना और उनका सही उपयोग करना है, ताकि यह किसी एक वर्ग विशेष के लाभ में न बदलें।
आगे का रास्ता
केंद्र सरकार के इस निर्णय के बाद अब यह देखना होगा कि राज्य सरकारें इस नए कानून को किस तरह लागू करती हैं और वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कौन-कौन से निर्णय लिए जाते हैं। यह कदम धार्मिक और सांप्रदायिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है, और इससे जुड़ी बहसें आने वाले समय में और तेज हो सकती हैं।