कुंभ मेले में चार भाई-बहनों का साहसिक कदम: पिता की मदद के लिए घर से भागकर लगाई चाय-नाश्ते की दुकान, पहले दिन से अच्छी कमाई

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के महाकुंभ मेले में एक अनोखी और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। गोरखपुर के चार भाई-बहनों ने अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए घर से भागकर मेले में चाय-नाश्ते की दुकान शुरू की है। इन बच्चों की एकमात्र उद्देश्य अपने परिवार के लिए आय का एक नया स्रोत स्थापित करना था, क्योंकि उनके पिता, जो पुलिस में कार्यरत हैं, की एकमात्र आय से परिवार का खर्च चलाना बेहद कठिन हो रहा था।
चाय-नाश्ते की दुकान की शुरुआत
22 वर्षीय बड़ी बहन, जो बीएड कर रही हैं, ने इस दुकान को शुरू करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कुंभ मेले का एक वीडियो देखा, जिसमें मेले में व्यावासिक अवसरों के बारे में बताया गया था। तभी उन्हें यह विचार आया कि वे भी इस अवसर का फायदा उठाकर अपने परिवार की मदद कर सकती हैं।
दुकान खोलने के लिए छोटी बहन ने अपनी सहेली से 10,000 रुपये उधार लिए, जबकि बड़ी बहन ने अपनी कान की बालियां गिरवी रखकर 5,000 रुपये जुटाए। इस प्रकार से यह भाई-बहन पैसे का इंतजाम कर दुकान शुरू करने में सफल हो गए।
दुकान का संचालन
20 वर्षीय छोटी बहन, जो अभी स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं, और उनके 15 व 17 साल के दो छोटे भाई मिलकर इस दुकान का संचालन कर रहे हैं। इस दुकान को काली सड़क पर स्थित एक स्थान पर खोला गया है, जो मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
इसके अलावा, इन भाई-बहनों ने पास में एक कमरा किराए पर लिया है, ताकि वे अपनी दुकान के संचालन के दौरान बेहतर व्यवस्था रख सकें। हालांकि, काम की अधिकता के कारण वे अक्सर दुकान पर ही रात बिताते हैं।
मेला प्रशासन का सहयोग
दुकान चलाने के दौरान मेले के प्रशासन का भी इन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है। प्रशासन ने केवल एक शर्त रखी है – दुकान पर स्वच्छता बनाए रखी जाए। इस सहयोग से इन भाई-बहनों का हौंसला और बढ़ा है और वे अपने छोटे व्यवसाय को बेहतर ढंग से चला पा रहे हैं।
भविष्य की योजना
इन भाई-बहनों का सपना केवल चाय-नाश्ते की दुकान तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य धीरे-धीरे एक छोटा रेस्टोरेंट और फिर एक होटल खोलने का है। वे मानते हैं कि यह ठेला उनके सपनों की पहली सीढ़ी है, और वे इसे अपने भविष्य में एक बड़े व्यवसाय में बदलने की ओर अग्रसर हैं।
इस कहानी ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति और संघर्ष मजबूत हो, तो किसी भी परिस्थिति को बदलने और सफलता पाने के लिए कोई भी कदम उठाया जा सकता है। इन बच्चों की मेहनत, हिम्मत और सामूहिक प्रयासों ने न केवल उनके परिवार की मुश्किलें आसान की हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी मार्गदर्शन किया है।