
फतेहगंज पश्चिमी के एक तस्कर का भाई नगर पंचायत चुनाव लड़ चुका है
फतेहगंज पश्चिमी 17 जनवरी। फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र में स्मैक तस्करी का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में, उत्तराखंड पुलिस ने यहाँ के दो प्रमुख तस्करों, नजाकत अली और सोहेल को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस ने नजाकत अली को पैर में गोली मारकर पकड़ लिया और उसे बाद में एम्स में इलाज के लिए भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे छुट्टी दे दी, इसके बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया।
तस्करी में कुख्यात कस्बा
फतेहगंज पश्चिमी तस्करी के मामले में एक कुख्यात कस्बा बन चुका है। यहाँ छोटे पैमाने के तस्कर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के तस्कर सक्रिय हैं। इस कस्बे में तस्करों का जाल इतना गहरा है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन तक प्रभावित हैं। कुछ समय पहले ही, एक और प्रमुख तस्कर रिफाकत को उत्तराखंड पुलिस ने स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था, और अब नजाकत अली और सोहेल की गिरफ्तारी ने इस तस्करी के नेटवर्क की गंभीरता को उजागर किया है।
नजाकत अली की गिरफ्तारी और राजनीतिक संबंध
नजाकत अली की गिरफ्तारी ने इलाके में राजनीतिक और पुलिस प्रशासन के रिश्तों पर भी सवाल उठाए हैं। बताया जा रहा है कि नजाकत अली का भाई राजनीति में सक्रिय है और उसने कस्बे से नगर पंचायत चुनाव भी लड़ा था। इसके अलावा, नजाकत अली का भाई कस्बे में एक दुकान भी चलाता है और अपनी राजनीतिक पहुँच का इस्तेमाल करता है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, नजाकत अली का भाई पुलिस के साथ अच्छे संबंध बनाए हुए है। यह चर्चा है कि उसने अपने तस्करी के कारोबार में पुलिस से भी मदद प्राप्त की थी। कुछ समय पहले एक शादी समारोह के दौरान, नजाकत अली के भाई ने थाने की पुलिस को शानदार दावत भी दी थी, जिससे उसके रिश्तों को लेकर स्थानीय लोगों में कई सवाल खड़े हो गए हैं।
तस्करी के जाल में फंसा कस्बा
फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक तस्करी की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। क्षेत्र में तस्करों के एक बड़े नेटवर्क का गठन हो चुका है, और स्थानीय पुलिस प्रशासन के लिए यह चुनौती बन गया है। इसके बावजूद, इस व्यापार में स्थानीय राजनीति और पुलिस के कुछ हिस्सों के शामिल होने के आरोप भी उभर कर सामने आ रहे हैं। हाल ही में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इस मुद्दे पर गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों तस्करों के खिलाफ पहले भी कई गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं, और अब उनकी गिरफ्तारी ने इस नेटवर्क की जड़ें और भी गहरी कर दी हैं। उत्तराखंड पुलिस की ओर से इस तस्करी के खिलाफ कार्रवाई तेज़ की गई है, लेकिन स्थानीय तंत्र के प्रभाव को देखते हुए यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।