
अदालत ने सुनाई उम्रकैद और जुर्माना
गुरुग्राम, 23 जनवरी 2025 – 2020 में एक व्यक्ति की मारपीट के बाद हत्या करने के मामले में गुरुग्राम की अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों दोषियों को उम्रकैद (कठोर कारावास) और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
घटना का विवरण:
11 अक्टूबर को दीपू किसी काम से गुरुग्राम आया था।
11 अक्टूबर 2020 को थाना खेड़की दौला, गुरुग्राम में एक सूचना मिली कि एक व्यक्ति दीपू, निवासी बसुंधरा, जिला गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) को मारपीट के बाद घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की और पाया कि घायल व्यक्ति को फोर्टिस अस्पताल रेफर किया गया था।
दीपू के भतीजे ने पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई, जिसमें बताया गया कि दीपू का व्यवसाय दिल्ली में था। 11 अक्टूबर को दीपू किसी काम से गुरुग्राम आया था। गांव भंगरोला, गुरुग्राम के पास, स्कूटी पर सवार दो व्यक्तियों ने दीपू की स्कूटी से एक्सीडेंट करने का आरोप लगाते हुए उस पर जानलेवा हमला किया। इस हमले में दीपू के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
घायल व्यक्ति की मृत्यु:
मामला दर्ज किया और आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू की।
दीपू को अस्पताल में इलाज के दौरान गंभीर चोटों के कारण 12 अक्टूबर 2020 को मौत हो गई। उसके बाद, पुलिस ने हत्या की धारा (302 आईपीसी) में मामला दर्ज किया और आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू की।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी:
अदालत ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
गुरुग्राम पुलिस ने मामले की गहनता से जांच की और दो आरोपियों – रोहित उर्फ मोनू (निवासी न्यू कॉलोनी, गांव गढ़ी हरसरू, गुरुग्राम) और रोहित उर्फ झब्बर (निवासी वजीरपुर, गुरुग्राम) – को गिरफ्तार किया। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले की जांच में आवश्यक साक्ष्य और गवाह एकत्रित किए। पुलिस ने इन साक्ष्यों को अदालत में प्रस्तुत किया, जिसके बाद अदालत ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
अदालत का फैसला:
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों आरोपियों को
23 जनवरी 2025 को एडिशनल सेशन जज सुनील कुमार दीवान की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने दोनों दोषियों को धारा 302 (हत्या) और धारा 341 (गलत तरीके से रोकने) के तहत उम्रकैद (कठोर कारावास) और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
सजा का महत्व:
कठोर प्रयास और गहन जांच के बाद यह फैसला आया है।
यह फैसला एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यह दर्शाता है कि अपराधी को न्याय के दायरे में लाने के लिए कड़ी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस द्वारा किए गए कठोर प्रयास और गहन जांच के बाद यह फैसला आया है।
अतिरिक्त समय तक सजा काटनी होगी।
गुरुग्राम पुलिस ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह सजा इस बात का उदाहरण है कि किसी भी अपराधी को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा।
इस मामले में कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर आरोपियों द्वारा जुर्माना नहीं भरा जाता तो उन्हें अतिरिक्त समय तक सजा काटनी होगी।
पुलिस की प्रतिक्रिया:
समाज में अपराधियों के खिलाफ कड़ी संदेश
गुरुग्राम पुलिस ने इस फैसले को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि यह न्याय की जीत है और इससे समाज में अपराधियों के खिलाफ कड़ी संदेश जाएगा। पुलिस ने यह भी अपील की कि नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अपराधों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, ताकि अपराधियों को उनके कृत्य की सजा मिल सके।