
प्रयागराज में वाइरल हुए बाबा,
प्रयागराज, 24 जनवरी: महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में एक ऐसा बाबा चर्चा का केंद्र बन गया है, जिसने अपनी अजीब बयानबाजी और मीडिया में बने रहने के लिए कई हरकतें की हैं। यह बाबा कोई और नहीं, बल्कि आईआईटी वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनका असली नाम अभय सिंह है और वह हरियाणा के रहने वाले हैं। निजी जीवन में कुछ घटनाओं के बाद उन्होंने वैराग्य को अपनाया और महाकुंभ में साधु बनने पहुंचे।
बाबा की पहली पहचान
अभय सिंह, जो अब आईआईटी वाले बाबा के नाम से मशहूर हो गए हैं, ने महाकुंभ में आकर अपने फक्कड़ अंदाज और अटपटी बयानबाजी से मीडिया का ध्यान आकर्षित किया। बाबा का दावा था कि वह विष्णु के अवतार हैं और खुद को शिव भी मानते हैं। यही नहीं, बाबा ने एक बयान में कहा था, “मैं बैठे-बैठे भारत का मैच किसी भी देश से जितवा सकता हूं,” जिससे उन्होंने काफी सुर्खियां बटोरीं। शुरू-शुरू में उनकी यह बयानबाजी प्रभावी रही और मीडिया में उनका नाम तेजी से फैलने लगा।
अजीब बयानबाजी और विवाद
आईआईटी वाले बाबा की बयानबाजी ने कुछ समय तक काम किया, लेकिन बाद में उनकी बातों को लेकर सवाल उठने लगे। कुछ लोगों ने उन्हें पागल घोषित कर दिया, तो कुछ ने उन्हें नशेड़ी तक कह दिया। हालांकि, बाबा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और उन्होंने अपनी बयानबाजी को जारी रखा।
नई नौटंकी और गुप्त साधना
जब बाबा को लगा कि उनकी बयानबाजी अब ज्यादा काम नहीं आ रही है, तो उन्होंने नई नौटंकी शुरू कर दी। मीडिया में एक खबर आई कि बाबा अब गुप्त साधना में निकल गए हैं, जिससे उनकी चर्चा फिर से शुरू हो गई। बाबा के कुटिया से यह खबर फैलने लगी कि वह अब साधना में लीन हो गए हैं, ताकि वह मीडिया और सोशल मीडिया में बने रहें।
बाबा का नया रूप और वाइरल होने का तरीका
कई दिन की गुप्त साधना के बाद बाबा ने नया रूप धारण किया, और अब वह फिर से वाइरल हो गए। वह कभी अपना रूप बदलकर तो कभी नई तरह की बयानबाजी से लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहे। अब अगर आप किसी भी स्क्रीन पर टीवी या फोन से खबरें देख रहे हैं, तो आपको बाबा का नया रूप देखने को मिल सकता है।
सवाल: बेरोजगारी के इस दौर में 35 लाख की नौकरी क्यों छोड़ेगा कोई?
अब एक और दिलचस्प सवाल उठता है कि इस दौर में जब बेरोजगारी बढ़ रही है, तो कोई सालाना 35 लाख रुपये की नौकरी क्यों छोड़ेगा? बाबा ने अपनी वैराग्य की यात्रा के दौरान यह सब छोड़ दिया। उन्होंने अपनी नई पहचान बनाने के लिए महाकुंभ का सहारा लिया और अपनी अलग-अलग नौटंकी से सबका ध्यान आकर्षित किया।
समाज में क्या संदेश दे रहे हैं बाबा?
इस पूरी घटना से यह सवाल उठता है कि क्या लोग वाइरल होने के लिए इस हद तक जा सकते हैं? क्या यह सचमुच समाज के लिए सही है या फिर यह केवल खुद को चर्चा में रखने का एक तरीका है? बाबा के बयान और हरकतों से यही प्रतीत होता है कि वह मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए खुद को प्रसिद्ध करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
यह मामला यह भी दर्शाता है कि सोशल मीडिया और मीडिया का प्रभाव अब किसी भी व्यक्ति को प्रसिद्ध करने के लिए किस हद तक उपयोग किया जा सकता है। अगर बाबा ने यह सब अपनी प्रसिद्धि के लिए किया है, तो क्या यह एक संदेश देता है कि अब किसी भी विवादास्पद बयान के जरिए ही लोग चर्चा में आ सकते हैं?
न्यू इंडिया न्यूज नेटवर्क के मुताबिक, आईआईटी वाले बाबा का यह सब कुछ केवल अपनी पहचान बनाने का एक तरीका हो सकता है, लेकिन क्या उनका यह तरीका सही है, यह सवाल अब भी बाकी है।