25 जनवरी मुंबई – बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी, जिनका नाम कभी अंडरवर्ल्ड से जोड़कर देखा गया था, अब आध्यात्मिक पथ पर चल पड़ी हैं। उन्होंने संन्यास लेकर किन्नर अखाड़े में शामिल होने का फैसला किया है। ममता ने दीक्षा लेकर नया नाम यामाई ममता नंद गिरी धारण किया है।
किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनेंगी ममता–
प्रयागराज महाकुंभ के दौरान आज शाम को ममता कुलकर्णी का पट्टाभिषेक समारोह आयोजित किया जाएगा। किन्नर अखाड़े ने उनके नाम पर सहमति जता दी है और उन्हें महामंडलेश्वर का दर्जा देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
संन्यास और किन्नर अखाड़ा में शामिल होना–
ममता कुलकर्णी ने अपने विवादित अतीत को पीछे छोड़ते हुए आध्यात्मिक जीवन को अपनाने का फैसला किया है। किन्नर अखाड़े में शामिल होकर उन्होंने दीक्षा ली और अपना नया नाम यामाई ममता नंद गिरी रखा। उनके इस निर्णय ने न केवल उनके प्रशंसकों बल्कि साधु-संतों और धार्मिक संगठनों का भी ध्यान आकर्षित किया है।
महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया–
प्रयागराज महाकुंभ के दौरान आयोजित पट्टाभिषेक समारोह में ममता को किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर का दर्जा दिया जाएगा। अखाड़े ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर सहमति जताई है। इस नई भूमिका में वह किन्नर अखाड़े की प्रतिनिधि बनेंगी और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाएंगी।
विवाद और साधु-संतों की नाराजगी–
हालांकि, ममता के इस फैसले को लेकर साधु-संतों के बीच असंतोष की लहर देखने को मिल रही है। उनका मानना है कि ममता का विवादित अतीत धार्मिक परंपराओं के साथ मेल नहीं खाता। इस विरोध ने महाकुंभ के धार्मिक माहौल में तनाव उत्पन्न कर दिया है।
आज का पट्टाभिषेक: एक ऐतिहासिक क्षण–
आज शाम को होने वाला पट्टाभिषेक समारोह ममता कुलकर्णी के आध्यात्मिक सफर की औपचारिक शुरुआत करेगा। यह समारोह महाकुंभ के सबसे चर्चित कार्यक्रमों में से एक बन गया है, और हर किसी की निगाहें इस ऐतिहासिक क्षण पर टिकी हैं।
धार्मिक समुदाय के भीतर एक नई बहस–
ममता कुलकर्णी का यह कदम उनके जीवन का एक नया अध्याय है, जो उनके आत्म-परिवर्तन और धार्मिकता की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है। हालांकि, इस घटना ने धार्मिक समुदाय के भीतर एक नई बहस को जन्म दिया है, जिससे महाकुंभ 2025 का माहौल और अधिक रोचक हो गया है।