
टॉयलेट्स की लागत करीब 29 से 30 लाख रुपये प्रति यूनिट बताई जा रही है,
ठेकेदारों को पहले ही दे दिए गए पैसे ??
गुरुग्राम, 27 जनवरी: हरियाणा के मानेसर नगर निगम में एक और बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसे पब्लिक टॉयलेट घोटाला कहा जा रहा है। यह घोटाला लगभग 40 करोड़ रुपये का है और यह मानेसर नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच हुई कथित मिलीभगत का परिणाम है। साल 2022 में मानेसर नगर निगम ने गांवों में पब्लिक टॉयलेट बनाने का वादा किया था, ताकि खुले में शौच की समस्या खत्म की जा सके और गुरुग्राम को शौचालय मुक्त बनाया जा सके। हालांकि, तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, यह योजना पूरी तरह से असफल रही और अब यह घोटाला सामने आया है।
तीन साल से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद अधिकतर टॉयलेट्स नहीं बने।
कूड़ा डंपिंग स्थल के पास पहाड़ी की चोटी पर बना है
सूत्रों के अनुसार, मानेसर नगर निगम की ओर से 107 पब्लिक टॉयलेट बनाने का दावा किया गया था। ठेकेदारों को इस काम का कांट्रैक्ट दिया गया था, लेकिन तीन साल से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद अधिकतर टॉयलेट्स नहीं बने। इसके बावजूद ठेकेदारों को पहले ही भारी रकम जारी कर दी गई। इन टॉयलेट्स की लागत करीब 29 से 30 लाख रुपये प्रति यूनिट बताई जा रही है, जबकि असल में टॉयलेट्स का निर्माण बहुत ही कम स्तर पर हुआ है।
टॉयलेट की गहरी खुदाई मात्र 5 फीट से अधिक नहीं
कुछ टॉयलेट्स तो ऐसी जगहों पर बनाए गए हैं
गांव नोरगपुर के निवासी कुड़िया राम ने आरोप लगाया कि एक पब्लिक टॉयलेट पर 29 से 30 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि टॉयलेट की गहरी खुदाई मात्र 5 फीट से अधिक नहीं की गई। कुछ टॉयलेट्स तो ऐसी जगहों पर बनाए गए हैं, जहां कोई व्यक्ति आसानी से नहीं पहुंच सकता। उदाहरण के लिए, एक टॉयलेट नगर निगम मानेसर के कूड़ा डंपिंग स्थल के पास पहाड़ी की चोटी पर बना है, जहां न तो पानी का कनेक्शन है और न ही वहां कोई टॉयलेट का उपयोग करने जाता है। कुड़िया राम ने यह भी बताया कि कई जगह तो टॉयलेट बनाए ही नहीं गए, लेकिन उनके लिए पहले ही पैसे रिलीज कर दिए गए।
तो उसी भ्रष्ट अधिकारी को जांच करने के लिए नियुक्त कर दिया जाता है,
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए करोड़ों का घोटाला किया। जब शिकायत की गई, तो नगर निगम मानेसर के अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की ठोस जांच नहीं की। इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब भी किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत की जाती है, तो उसी भ्रष्ट अधिकारी को जांच करने के लिए नियुक्त कर दिया जाता है, जिससे वह अपनी जांच में खुद को क्लीन चिट दे देता है।
लोगों को इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है।
यह घोटाला इस बात को भी उजागर करता है कि सरकारी परियोजनाओं में कैसे अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता के पैसे का इस्तेमाल हो रहा है। कुड़िया राम ने आरोप लगाया कि पूरी योजना और इसके तहत किए गए खर्चों की कोई स्पष्टता नहीं है, और लोगों को इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करेगी
यह मामला अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या हरियाणा सरकार इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करेगी या यह मामला भी पहले के घोटालों की तरह दबकर रह जाएगा। लोग यह जानने के लिए बेचैन हैं कि आखिर कब तक इस तरह के घोटाले होते रहेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे।
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे।
इस पूरे मामले में मानेसर नगर निगम के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं और लोग सरकार से इस घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।