हरियाणा 30 जनवरी – दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के “हरियाणा सरकार यमुना में जहर मिला रही है” बयान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हरियाणा सरकार ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। इस मामले में सोनीपत जिला अदालत ने अरविंद केजरीवाल को तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
कुछ दिन पहले अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि हरियाणा सरकार यमुना नदी के पानी में जहर मिला रही है, जिससे दिल्ली को दूषित पानी मिल रहा है। उनका कहना था कि इस पानी में अमोनिया की मात्रा इतनी अधिक है कि इसे शुद्ध करना भी संभव नहीं है, और इससे दिल्ली के कई इलाकों में जल संकट गहरा गया है।
केजरीवाल के इस बयान के बाद हरियाणा सरकार ने इसे गलत और भ्रामक करार दिया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली को शुद्ध पानी ही भेजा जा रहा है और इस तरह के आरोपों से जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को अपनी जल वितरण प्रणाली सुधारने की जरूरत है, न कि हरियाणा सरकार पर झूठे आरोप लगाने की।केजरीवाल के बयान को हरियाणा सरकार ने आपत्तिजनक मानते हुए कानूनी रास्ता अपनाया। इस मामले में जल सेवा प्रभाग के कार्यकारी अभियंता ने सोनीपत जिला अदालत में शिकायत दर्ज करवाई।
शिकायत में कहा गया है –
केजरीवाल का बयान गलत, भ्रामक और झूठा है, जो जनता में डर और अफवाह फैलाने का काम कर रहा है।
इस तरह के बयान से दिल्ली और हरियाणा के बीच जल प्रबंधन को लेकर गलतफहमी बढ़ सकती है।
आपदा प्रबंधन अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत यह बयान कानून का उल्लंघन करता है।
इस शिकायत को संज्ञान में लेते हुए सोनीपत जिला अदालत ने केजरीवाल को तलब किया है।
हरियाणा सरकार का जवाब-
हरियाणा सरकार ने कहा है कि यमुना का पानी पूरी तरह से सुरक्षित और मानकों के अनुसार है।
दिल्ली में पानी की समस्या जल वितरण में खामियों के कारण है, न कि हरियाणा से आने वाले पानी के कारण।
केजरीवाल सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए हरियाणा सरकार पर झूठे आरोप लगा रही है।
दिल्ली सरकार का बचाव –
वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) का कहना है कि हरियाणा से आने वाला पानी वास्तव में दूषित है, और दिल्ली जल बोर्ड की रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है।
केजरीवाल ने जो कहा है, वह दिल्ली की जनता के हित में है और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
हरियाणा सरकार को इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय जल प्रबंधन को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।