
पहले यह उम्र 5.5 साल थी,
चंडीगढ़, 03 फरवरी: हरियाणा सरकार ने शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए सभी सरकारी और निजी स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिले के लिए बच्चे की न्यूनतम उम्र 6 साल निर्धारित कर दी है। पहले यह उम्र 5.5 साल थी, लेकिन अब इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दिशानिर्देशों के अनुसार बढ़ाया गया है। यह नियम शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू किया जाएगा।
क्या है नया नियम?
हरियाणा के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अब पहली कक्षा में वही बच्चे दाखिला ले सकेंगे, जिनकी उम्र 6 साल या उससे अधिक होगी। पहले 5.5 साल के बच्चों को भी प्रवेश मिल जाता था, लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत अब इसे बढ़ाकर 6 साल कर दिया गया है।
नए फैसले की वजह क्या है?
हरियाणा सरकार ने यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार लिया है। इस नीति में बच्चों के शुरुआती शिक्षा चरण (Foundational Stage) पर अधिक ध्यान दिया गया है। NEP के तहत, 3 साल प्री-प्राइमरी और फिर 2 साल की तैयारी के बाद पहली कक्षा में प्रवेश की सिफारिश की गई है। इससे बच्चों को मानसिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से बेहतर विकास का मौका मिलेगा।
नए नियम से क्या होगा बदलाव?
✅ बच्चों की पढ़ाई की नींव मजबूत होगी
✅ बच्चे मानसिक और सामाजिक रूप से ज्यादा परिपक्व होंगे
✅ बच्चों को शिक्षा प्रणाली के अनुरूप बेहतर तरीके से तैयार किया जाएगा
✅ अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मानकों के अनुसार नई प्रणाली लागू होगी
कब से लागू होगा नया नियम?
हरियाणा सरकार ने इस नियम को शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब यह है कि अगले साल से पहली कक्षा में दाखिले के लिए बच्चे की उम्र 6 साल अनिवार्य होगी।
अभिभावकों के लिए क्या होगा असर?
नए नियम के लागू होने से उन अभिभावकों को अगले साल अपने बच्चों के दाखिले के लिए नई योजना बनानी होगी जिनके बच्चे अभी 5.5 साल की उम्र में पहली कक्षा में प्रवेश के योग्य होते थे। अब उन्हें प्री-प्राइमरी की शिक्षा पूरी करने के बाद ही पहली कक्षा में प्रवेश मिलेगा।