दिल्ली 4 फरवरी -फोर्ब्स ने हाल ही में दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की एक सूची जारी की है। इस सूची में राजनीतिक प्रभाव, आर्थिक शक्ति, सैन्य ताकत और वैश्विक संबंधों जैसे कई मानकों को आधार बनाया गया है। हालांकि, इस सूची में भारत को जगह नहीं मिली, जो कई लोगों के लिए चौंकाने वाली खबर है। आइए जानते हैं टॉप 10 देशों के बारे में—
1. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति रखता है। इसकी मजबूत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और प्रभावशाली नीतियां इसे शीर्ष स्थान पर बनाए रखती हैं।
2. चीन
तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल सैन्य ताकत के कारण चीन इस सूची में दूसरे स्थान पर है। वैश्विक व्यापार में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका भी इसे शक्तिशाली बनाती है।
3. रूस
रूस अपनी सैन्य शक्ति और ऊर्जा संसाधनों के कारण हमेशा से वैश्विक राजनीति में प्रभावशाली रहा है। इसका अंतरराष्ट्रीय मामलों में दखल भी इसे शीर्ष देशों में बनाए रखता है।
4. जर्मनी
यूरोप की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाला देश होने के साथ-साथ जर्मनी राजनीतिक स्थिरता और तकनीकी नवाचार में भी अग्रणी है।
5. यूनाइटेड किंगडम (UK)
यूके का आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक प्रभाव इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में शामिल करता है। ब्रेक्सिट के बाद भी इसकी वैश्विक स्थिति मजबूत बनी हुई है।
6. दक्षिण कोरिया
तकनीकी नवाचार, मजबूत अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति के कारण दक्षिण कोरिया इस सूची में छठे स्थान पर है।
7. फ्रांस
सैन्य ताकत, परमाणु शक्ति और यूरोप में मजबूत आर्थिक स्थिति के कारण फ्रांस इस सूची में सातवें स्थान पर है।
8. जापान
तकनीक और अर्थव्यवस्था के मामले में जापान एक प्रमुख शक्ति है। इसकी वैश्विक आर्थिक नीतियां और रक्षा क्षमताएं इसे प्रभावशाली बनाती हैं।
9. सऊदी अरब
तेल उत्पादन और आर्थिक शक्ति के कारण सऊदी अरब इस सूची में शामिल है। इसकी विदेश नीति और क्षेत्रीय प्रभाव भी इसे मजबूत बनाते हैं।
10. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय निवेश के कारण यूएई भी शक्तिशाली देशों की सूची में शामिल है।
भारत क्यों नहीं शामिल?
हालांकि भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसकी सैन्य शक्ति भी मजबूत मानी जाती है, लेकिन इस सूची में इसे जगह नहीं मिली। इसकी वजह हो सकती है वैश्विक राजनीतिक प्रभाव में कुछ कमी, कूटनीतिक निर्णयों का असर और आर्थिक अस्थिरता के कुछ पहलू।
भारत लगातार अपनी वैश्विक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है, और भविष्य में ऐसे किसी भी सूची में इसका नाम आ सकता है।