
बजट पर चर्चा कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने रखी अपनी राय,
गुरुग्राम,5 फरवरी – नई दिल्ली स्थित लिंग्यास ललिता देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस (LLDIMS) के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स में केंद्रीय बजट पर चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों के विचारों से महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यक्रम में कैपेरो मारूति के सीईओ व सीआईआई गुरुग्राम जोन के वाइस चेयरमैन विनोद बापना विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ केएसवी टैक्स कंसल्टेंट के मैनेजिंग पार्टनर डॉ. सचिन शर्मा, कृष्णा एंड एसोसिएट के मैनेजिंग पार्टनर सीए अंकुर अग्रवाल और एलएलडीआईएमएस की सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिखा गुप्ता भी मौजूद रहीं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जोहा अशफाक और आशु का विशेष योगदान रहा।
बजट पर चर्चा का उद्देश्य
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था –
- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को प्रस्तुत बजट के प्रावधानों की समीक्षा।
- सरकार की आर्थिक नीतियों के प्रभावों का विश्लेषण।
- बजट के संभावित लाभों और चुनौतियों पर चर्चा।
- भविष्य की नीति निर्माण में सुधार हेतु सुझाव देना।
बजट के प्रमुख बिंदु और राहत की घोषणाएं
विनोद बापना ने बजट के महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि अब वेतनभोगियों को 12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। टैक्स स्लैब इस प्रकार हैं:
- 12 से 16 लाख आय पर 15% टैक्स।
- 16 से 20 लाख आय पर 20% टैक्स।
- 20 से 24 लाख आय पर 25% टैक्स।
- 24 लाख से अधिक आय पर 30% टैक्स।
इसके अलावा, सरकार ने बुजुर्गों की आय पर छूट की सीमा को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया है। साथ ही, टीडीएस की सीमा 6 लाख रुपये तक कर दी गई है, जिससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
स्टार्टअप और उद्योगों के लिए राहत
बजट में नए स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:
- नए स्टार्टअप को 10 करोड़ तक के लोन की सुविधा।
- छोटे उद्योगों के लिए 10 लाख क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएंगे।
- नए स्टार्टअप के लिए ऋण सीमा 10 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ की गई।
- किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड की सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की गई।
- मेडिकल क्षेत्र में अगले पांच वर्षों में 75,000 सीटें बढ़ाने की योजना।
- नए एयरपोर्ट निर्माण और परमाणु ऊर्जा मिशन पर 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
बजट पर चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा
विनोद बापना ने कहा कि बजट पर चर्चा मात्र एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह एक लोकतांत्रिक अभ्यास है, जिससे सरकार की आर्थिक नीतियां अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की चर्चाओं से आम जनता को कराधान, सरकारी योजनाओं और बजट प्रावधानों की बेहतर समझ मिलती है।
उन्होंने कहा कि बजट पर चर्चा से सरकार को भी अपने नीतिगत फैसलों को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। इससे आम जनता को यह समझने में आसानी होती है कि कौन-से नए कर लागू किए गए हैं, कहां छूट दी गई है और बजट का अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
विशेषज्ञों के विचार
कार्यक्रम में पहुंचे अन्य विशेषज्ञों ने भी बजट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की:
- डॉ. सचिन शर्मा (मैनेजिंग पार्टनर, केएसवी टैक्स कंसल्टेंट) ने कहा कि सरकार द्वारा स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों के लिए दी गई रियायतें उद्यमिता को बढ़ावा देंगी और नए रोजगार सृजन में सहायक होंगी।
- सीए अंकुर अग्रवाल (कृष्णा एंड एसोसिएट) ने कर सुधारों को आम जनता के लिए लाभकारी बताया और कहा कि टीडीएस छूट की सीमा बढ़ाने से टैक्स पेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी।
- डॉ. शिखा गुप्ता (सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर, एलएलडीआईएमएस) ने कहा कि बजट शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधार लाने का संकेत देता है, जिससे देश की सामाजिक संरचना मजबूत होगी।
कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों और छात्रों के बीच बजट के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर गहन चर्चा हुई। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की आर्थिक नीतियों को समझने और सुधारने के लिए बजट पर चर्चा आवश्यक है। इस कार्यक्रम से छात्रों को वित्तीय जागरूकता मिली और वे अर्थव्यवस्था की बेहतर समझ हासिल कर सके।
इस तरह के संवाद देश के आर्थिक विकास को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और नीति-निर्माण में सुधार का मार्ग प्रशस्त करते हैं।