
अवैध निर्माण माफिया निगम के अधिकारियों प्रभारी।
गुरुग्राम, 10 फरवरी:
गुरुग्राम नगर निगम के अधीन आने वाले क्षेत्रों में अवैध निर्माण की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। स्थानीय निवासियों और युवाओं द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि नगर निगम के कुछ अधिकारी स्वयं अवैध निर्माण में शामिल होने के साथ-साथ अवैध निर्माण कर्ताओं से मिलीभगत भी कर रहे हैं। इससे गुरुग्राम के कुछ क्षेत्रों में अवैध निर्माण की भरमार हो गई है, जिसे लेकर आम जनता में काफी नाराजगी और चिंता व्याप्त है।
अवैध निर्माण का बढ़ता प्रकोप:
खांडसा रोड के निवासी राजेंद्र सिंह, भूदेव सिंह, उर्मिला और अन्य ने बताया कि गुरुग्राम का एक क्षेत्र, जिसे आमतौर पर “ज़ोन वन” कहा जाता है, में अवैध निर्माण की भरमार है। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, नगर निगम के अधिकारी अवैध निर्माण कर्ताओं से मिलीभगत कर उनकी गतिविधियों पर आंख मूंद लेते हैं। राजीव नगर, हीरानगर और सोहना चौक जैसे क्षेत्रों में भी न केवल अवैध निर्माण हो रहा है बल्कि फ्लोर बनाने के बाद उन्हें बिक्री के लिए भी प्रस्तुत किया जा रहा है।
अधिकारी आरोपित, मिलीभगत और धमकियों का जाल:
खांडसा रोड के निवासी हरिओम यादव और हरि सिंह यादव समेत कई अन्य युवाओं ने जानकारी दी है कि पहले नगर निगम के अधिकारी स्वयं अवैध निर्माण में लिप्त हो जाते हैं। उसके बाद, मोटी रकम लेने के लिए निर्माण कार्य को रोकने की धमकियाँ भी देते हैं। वे आरोप लगाते हैं कि ज़ोन वन के जेई (जूनियर इंजीनियर) और उनके उच्च अधिकारी नियमित रूप से अवैध निर्माण स्थलों के आसपास घूमते रहते हैं। दिखावे के लिए नोटिस लगा देने के बाद कुछ ही दिनों में नोटिस हट जाते हैं और निर्माण कार्य फिर से तेज़ी से शुरू हो जाता है।
मुख्यमंत्री की कड़ी फटकार और चेतावनी:
हर महीने आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम नगर निगम के कमिश्नर पर कई बार तीखा कटाक्ष किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगली बैठक में ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आनी चाहिए। हालांकि, प्रत्येक बैठक में नगर निगम के खिलाफ शिकायतों का भंडार बना रहता है, जिससे अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत को उजागर किया जाता है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया:
गुरुग्राम भूतेश्वर मंदिर की निवासी रामनिवास यादव ने कहा,
“कमिश्नर अशोक गर्ग शायद मुख्यमंत्री से ऊंची पकड़ रखते हैं। प्रभावशाली होने के कारण वे मुख्यमंत्री के आदेशों की परवाह नहीं करते। अबकी बार जब मुख्यमंत्री गुरुग्राम आएंगे, तो यह बात जरूर उठाई जाएगी कि क्या कमिश्नर वास्तव में मुख्यमंत्री से अधिक प्रभावशाली हो सकते हैं। यदि नहीं, तो उनके आदेश का पालन क्यों नहीं किया जाता?”
कमिश्नर से संपर्क में समस्या:
गुरुग्राम नगर निगम के कमिश्नर अशोक गर्ग से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके कार्यालय में उन्हें आम जनता से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती। यह भी बताया गया है कि कमिश्नर कार्यालय में केवल आवश्यक काम के लिए ही मौजूद रहते हैं और अधिकांश समय अपने निवास में बिताते हैं। इस वजह से उनसे सरकारी पक्ष से कोई स्पष्ट बयान या प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।
नगर निगम के अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं
अभी तक नगर निगम के अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं देखने को मिली है, जिसके चलते गुरुग्राम में अवैध निर्माण की समस्या बिना नियंत्रण के बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा कमिश्नर पर लगातार फ लगाई जा रही है, लेकिन यह कदम अब तक प्रभावी साबित नहीं हो सके हैं। स्थानीय निवासियों की शिकायतें और प्रशासनिक लापरवाही की कहानियाँ इस बात का संकेत देती हैं कि जल्द ही इस मुद्दे पर कड़ी कार्यवाही की आवश्यकता है ताकि गुरुग्राम में अवैध निर्माण को रोका जा सके और नगर व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जा सके।