प्रयागराज 12 फरवरी -देश में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग फिर से जोर पकड़ रही है। ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने केंद्र सरकार को इस संबंध में 33 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।
प्रयागराज में मीडिया से बातचीत करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। उन्होंने बताया कि वे पिछले डेढ़ साल से इस मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और अब इसे लेकर निर्णायक कदम उठाने जा रहे हैं।
मांगें और प्रस्तावित यात्रा
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी प्रमुख मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा:
गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए।
गोहत्या को संज्ञेय अपराध घोषित किया जाए।
सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में गाय से जुड़े विषयों को शामिल किया जाए।
उन्होंने बताया कि इन मांगों को पूरा करने के लिए 33 दिनों की विशेष यात्रा निकाली जाएगी, जो माघी पूर्णिमा के अगले दिन गुरुवार से शुरू होकर 17 मार्च को दिल्ली पहुंचेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यात्रा के अंतिम दिन एक बड़ा फैसला लिया जाएगा।
आंदोलन की गंभीरता और राजनीतिक प्रभाव
गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग पहले भी कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा उठाई जा चुकी है, लेकिन अब यह आंदोलन एक नए स्तर पर पहुंच गया है। शंकराचार्य की यह घोषणा केंद्र सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है, विशेष रूप से आगामी चुनावों को देखते हुए।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिलता है।