दिल्ली 13 फरवरी -यह एक सबसे बड़ा झूठ है कि पहली बार मां बनने पर सी-सेक्शन कराना ही पड़ता है। बहुत सी महिलाएं इस भ्रांति में रहती हैं कि पहली प्रेग्नेंसी में ऑपरेशन से ही डिलीवरी संभव होती है, लेकिन यह सच नहीं है। अगर मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, तो नॉर्मल डिलीवरी पूरी तरह संभव है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार, लगभग 85% मामलों में नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है, जबकि केवल 15% मामलों में ही सी-सेक्शन की आवश्यकता होती है। सही जानकारी, अच्छी देखभाल और डॉक्टर की सलाह से पहली बार मां बनने वाली महिलाओं के लिए भी नॉर्मल डिलीवरी एक सुरक्षित और बेहतर विकल्प हो सकता है।
क्यों बढ़ रहा है सी-सेक्शन का ट्रेंड?
आजकल अस्पतालों में सी-सेक्शन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कई बार यह मेडिकल जरूरत के बजाय सुविधा के कारण किया जाता है। कुछ प्राइवेट अस्पताल ऑपरेशन से डिलीवरी को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि यह जल्दी, आसान और अधिक मुनाफेदार होता है। इसके अलावा, कई महिलाएं डिलीवरी के दर्द से बचने के लिए भी सी-सेक्शन को प्राथमिकता देने लगती हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सी-सेक्शन एक बड़ी सर्जरी होती है, जिसमें रिकवरी का समय अधिक लगता है और भविष्य में जटिलताओं की संभावना भी बढ़ जाती है।
नॉर्मल डिलीवरी के फायदे
जल्दी रिकवरी – नॉर्मल डिलीवरी के बाद महिला जल्दी ठीक हो जाती है और जल्द ही सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकती है।
कम जटिलताएं – सी-सेक्शन में इन्फेक्शन, ब्लड लॉस और अन्य सर्जिकल जटिलताएं अधिक हो सकती हैं।
बच्चे के लिए बेहतर – नॉर्मल डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में श्वसन संबंधी समस्याएं कम होती हैं।
आने वाली प्रेग्नेंसी में आसानी – नॉर्मल डिलीवरी के बाद भविष्य में भी नॉर्मल डिलीवरी की संभावना अधिक रहती है, जबकि सी-सेक्शन के बाद अगली डिलीवरी में और जटिलताएं हो सकती हैं।
कैसे बढ़ाएं नॉर्मल डिलीवरी की संभावना?
नियमित व्यायाम करें – प्रेग्नेंसी में हल्के-फुल्के योग और एक्सरसाइज करने से डिलीवरी के समय मांसपेशियां मजबूत रहती हैं और नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ती है।
हेल्दी डाइट लें – आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन लेने से शरीर स्वस्थ रहता है और डिलीवरी आसान होती है।
स्ट्रेस से बचें – मानसिक तनाव से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे नॉर्मल डिलीवरी की संभावना कम हो जाती है।
डॉक्टर की सलाह लें – रेगुलर चेकअप कराना जरूरी है ताकि कोई भी कॉम्प्लिकेशन समय रहते पहचानी जा सके।
कब जरूरी होता है सी-सेक्शन?
हालांकि नॉर्मल डिलीवरी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, लेकिन कुछ परिस्थितियों में सी-सेक्शन जरूरी हो सकता है:
बेबी की गलत पोजीशन – अगर बच्चा उल्टा है (ब्रीच पोजीशन) तो नॉर्मल डिलीवरी में दिक्कत आ सकती है।
गर्भनाल की समस्या – अगर गर्भनाल बच्चे के गले में लिपटी हो या ब्लॉकेज हो, तो ऑपरेशन जरूरी हो सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज – इन स्थितियों में जटिलताएं बढ़ सकती हैं, जिससे सी-सेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।
मल्टीपल प्रेग्नेंसी – जुड़वां या ट्रिपल बच्चे होने पर भी कई बार सी-सेक्शन की सलाह दी जाती है।
पहली बार मां बनने पर भी नॉर्मल डिलीवरी पूरी तरह संभव है। जरूरी है कि महिलाएं सही जानकारी, हेल्दी लाइफस्टाइल और रेगुलर मेडिकल चेकअप को अपनाएं। सी-सेक्शन केवल मेडिकल जरूरत होने पर ही कराया जाना चाहिए, न कि डर या सुविधा के कारण। महिलाओं को अपने शरीर पर भरोसा रखना चाहिए और प्रसव के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना चाहिए।