हरियाणा 14 फरवरी -हरियाणा विधानसभा में संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड), लोकसभा के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने विधायकों को संबोधित करते हुए लोकतंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विधायिका लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है और सभी जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे इसे और अधिक सशक्त बनाएं।
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की समझ आवश्यक
मुख्यमंत्री सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि एक प्रभावी लोकतंत्र के लिए विधायकों का अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल कानून निर्माण का मंच ही नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को उठाने और उनके समाधान का भी महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने विधायकों से अपील की कि वे सदन में स्वस्थ बहस को बढ़ावा दें और राज्य के विकास के लिए सार्थक चर्चा करें।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विधायकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। वे जनता और सरकार के बीच की कड़ी होते हैं। उन्होंने कहा कि एक जागरूक और जिम्मेदार विधायक अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सदन में रखता है और उनके समाधान के लिए सरकार पर दबाव बनाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विभिन्न दलों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और सभी को अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से रखने का अधिकार है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे सदन की गरिमा बनाए रखें और नियमों के अनुसार कार्यवाही में भाग लें।
प्रबोधन कार्यक्रम की विशेषताएँ-
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विधायकों को संसदीय प्रक्रियाओं, कानून निर्माण की प्रक्रिया और विधानसभा में अनुशासन बनाए रखने से जुड़ी जानकारियाँ प्रदान करना था। लोकसभा सचिवालय से आए विशेषज्ञों ने विधायकों को संसदीय कार्यों से जुड़ी बारीकियों की जानकारी दी और उन्हें प्रभावी जनप्रतिनिधित्व के गुर सिखाए।
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस अवसर पर कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम नए और अनुभवी विधायकों के लिए समान रूप से उपयोगी होते हैं। इससे उन्हें अपने दायित्वों को बेहतर ढंग से निभाने की प्रेरणा मिलती है और वे अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को अधिक प्रभावी ढंग से सदन में उठा सकते हैं।
लोकतंत्र को मजबूत करने की अपील
मुख्यमंत्री सैनी ने सभी विधायकों से आग्रह किया कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखें और सदन में स्वस्थ चर्चा को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि विधायिका को सशक्त बनाना हर विधायक की जिम्मेदारी है और इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए।
इस कार्यक्रम में विभिन्न दलों के विधायकों ने भाग लिया और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर गहन चर्चा की।