अधिकारियों पर 5.86 करोड़ का जुर्माना, 3.02 करोड़ अब भी बकाया

राज्य सूचना आयोग में 7200 केस पेंडिंग, निपटाने में लगेंगे 8 साल, अपीलकर्ता परेशान
चंडीगढ़, 14 फरवरी:
हरियाणा राज्य सूचना आयोग में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दायर 7216 अपीलें और शिकायतें अभी भी लंबित हैं। मौजूदा गति से मामलों का निपटारा जारी रहा तो सभी केसों को सुलझाने में करीब आठ साल लग सकते हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने आयोग से प्राप्त सूचना के आधार पर यह खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) को निष्प्रभावी बनाने की कोशिश कर रही है।
20 वर्षों में 128.39 करोड़ रुपये खर्च, RTI जागरूकता पर मात्र 2.50 लाख रुपये
पीपी कपूर द्वारा मिली RTI जानकारी के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में सूचना आयोग पर 128.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
- इसमें 92 करोड़ रुपये वेतन और भत्तों पर,
- और 36.39 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्चों पर खर्च हुए हैं।
लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि RTI एक्ट को लेकर जनता को जागरूक करने पर सिर्फ 2.50 लाख रुपये खर्च किए गए और पिछले 14 वर्षों में इस पर एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ।
लंबित मामलों की संख्या और निपटान की धीमी रफ्तार
- 1 जनवरी 2024 तक आयोग में 8340 केस लंबित थे, जो 31 दिसंबर 2024 तक 7216 हो गए।
- यानी पूरे साल में सिर्फ 1124 मामलों का निपटारा हुआ।
- अगर यही गति बनी रही तो लंबित केसों को निपटाने में आठ साल से अधिक का समय लग सकता है।
सूचना अधिकारियों पर 5.86 करोड़ का जुर्माना, 3.02 करोड़ अब भी बकाया
RTI एक्ट के तहत जानकारी देने में देरी या इनकार करने वाले सूचना अधिकारियों पर आयोग ने अब तक 5.86 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
- लेकिन इसमें से सिर्फ 2.84 करोड़ रुपये ही वसूले गए हैं,
- जबकि 3.02 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं।
आयोग के पास सूचना अधिकारियों की सूची तक नहीं!
पीपी कपूर ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग के पास प्रदेश में कार्यरत जन सूचना अधिकारियों (PIOs) और प्रथम अपीलीय अधिकारियों (FAAs) की कोई सूची उपलब्ध नहीं है।
- आवेदनकर्ता को यह तक नहीं पता कि वह RTI के लिए किस अधिकारी के पास जाए और अपील कहां करे।
- आयोग को यह भी जानकारी नहीं है कि इन अधिकारियों को RTI एक्ट-2005 की ट्रेनिंग दी गई है या नहीं।
1974 मामलों में विभागीय कार्रवाई की सिफारिश
सूचना आयोग ने अब तक 1974 मामलों में दोषी सूचना अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश सरकार से की है।
इसके अलावा, आयोग ने
- 92.22 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अपीलकर्ताओं को दिलवाई है।
RTI एक्ट को निष्प्रभावी बनाने की कोशिश – पीपी कपूर
पीपी कपूर ने राज्य सरकार पर RTI एक्ट को कमजोर करने का आरोप लगाया।
- सूचना अधिकारी समय पर जवाब नहीं देते,
- सूचना आयोग में अपील करने पर महीनों तक लंबी तारीखें मिलती हैं,
- जिससे अपीलकर्ताओं को न्याय पाने में अनावश्यक देरी होती है।
सरकार से मांग
पीपी कपूर ने सरकार से मांग की कि—
- आयोग में लंबित सभी केसों का निपटारा युद्ध स्तर पर किया जाए।
- RTI एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
- बकाया 3.02 करोड़ रुपये की जुर्माना राशि वसूली जाए।
- प्रदेश में नियुक्त सभी जन सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को RTI एक्ट-2005 की अनिवार्य ट्रेनिंग दी जाए।
(रिपोर्ट: विशेष संवाददाता)