दिल्ली 14 फरवरी -कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपने ही बयान को लेकर घिरते नजर आ रहे हैं। हाल ही में उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया था कि “क्या गंगा में डुबकी लगाने से गरीबी समाप्त हो जाएगी?” उनके इस बयान पर सियासी हलकों में काफी बवाल मचा था। भाजपा ने इसे आस्था पर चोट करार दिया था और कांग्रेस पर हिंदू विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया था।
अब हालात ऐसे बन गए हैं कि कांग्रेस के ही कई बड़े नेता महाकुंभ में जाकर संगम में डुबकी लगा चुके हैं। भाजपा ने इस मुद्दे को भुनाते हुए खड़गे पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जब कांग्रेस के डी. शिवकुमार, दिग्विजय सिंह और सचिन पायलट खुद महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे, तो क्या अब गरीबी समाप्त हो जाएगी?
भाजपा का पलटवार
भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा,
“खड़गे जी को गंगा और आस्था का महत्व तब समझ नहीं आया जब उन्होंने गरीबों की भावनाओं पर सवाल उठाए। अब उन्हीं की पार्टी के नेता संगम में डुबकी लगा रहे हैं, तो क्या अब कांग्रेस मान लेगी कि गंगा स्नान से गरीबी दूर हो सकती है?”
कांग्रेस नेताओं का बचाव
कांग्रेस के नेताओं ने इस विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि खड़गे का बयान भाजपा की नीतियों पर तंज था, न कि आस्था पर। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा,
“हम आस्था का सम्मान करते हैं, लेकिन भाजपा हर मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम बना देती है। खड़गे जी ने सिर्फ यह पूछा था कि क्या सरकार गंगा स्नान को गरीबी उन्मूलन की नीति मान रही है?”
महाकुंभ में कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति
महाकुंभ 2025 के पहले शाही स्नान में कई कांग्रेस नेता शामिल हुए। डी. शिवकुमार, दिग्विजय सिंह और सचिन पायलट ने संगम में डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना भी की। इससे भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का एक और मौका मिल गया।
राजनीतिक मायने
इस पूरे घटनाक्रम के दो बड़े राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं:
- कांग्रेस अपनी हिंदू विरोधी छवि बदलने की कोशिश कर रही है, इसलिए उसके बड़े नेता महाकुंभ में शामिल हो रहे हैं।
- भाजपा इस मुद्दे को आगामी चुनावों में भुनाना चाहती है, जिससे कांग्रेस को बैकफुट पर लाया जा सके।
मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान से उठे विवाद ने कांग्रेस को असहज स्थिति में ला दिया है। भाजपा इसे कांग्रेस की आस्था विरोधी राजनीति करार दे रही है, जबकि कांग्रेस अपने नेताओं के महाकुंभ में शामिल होने को व्यक्तिगत आस्था का मामला बता रही है। अब देखना होगा कि यह मुद्दा चुनावी माहौल में किस तरह तूल पकड़ता है।