मणिपुर 14 फरवरी -मणिपुर से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। 9 फरवरी को बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके तीन दिन बाद केंद्र सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया।
जातीय संघर्ष के चलते बिगड़ी कानून-व्यवस्था
मणिपुर में पिछले साल मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष जारी है। इस हिंसा में अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं।
कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया था। इस कारण 9 फरवरी को मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने राज्यपाल अंजुलि चिब्बर गुप्ता को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
बीजेपी की बैठक और राष्ट्रपति शासन की घोषणा
मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर बैठकें शुरू की थीं। मणिपुर मामलों के प्रभारी संबित पात्रा ने पार्टी के अन्य नेताओं के साथ चर्चा की। हालांकि, कोई स्पष्ट निर्णय न निकलने के कारण केंद्र सरकार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा। 13 फरवरी को इसकी औपचारिक घोषणा की गई।
मणिपुर की राजनीतिक स्थिति
बीरेन सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री के रूप में 2017 से कार्यरत थे और 2022 में फिर से सत्ता में आए थे। लेकिन राज्य में जारी जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
बीजेपी अब नए मुख्यमंत्री के चयन पर मंथन कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रमुख नेताओं के नामों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।
आगे की संभावनाएँ
राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद अब मणिपुर का प्रशासन केंद्र सरकार के हाथों में आ गया है। आगामी दिनों में शांति बहाली के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं।
इस घटनाक्रम पर मणिपुर के राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की भी नजर बनी हुई है। विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार की आलोचना की है और जल्द चुनाव कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस संकट से कैसे निपटती है।