दिल्ली 15 फरवरी – धरती की तबाही की तमाम भविष्यवाणियां आपने सुनी होंगी. लेकिन ये भविष्यवाणी नहीं, सच है. साइंटिस्ट का दावा है कि अंतरिक्ष से Asteroid 2024 YR4 नाम का एक क्षुद्रग्रह आ रहा है, जो 100 मीटर तक चौड़ा है.
यह दिसंबर 2032 में धरती के बिल्कुल करीब से गुजरेगा और संभावना है कि यह धरती से टकरा जाए. तब इसकी स्पीड 38000KM प्रतिघंटे की होगी. और अगर यह धरती पर टकराया तो कई शहरों को भस्म कर देगा. इसलिए इसकी टक्कर बचाने के लिए चीन ने ‘आर्मी’ तैनात करनी शुरू कर दी है. यह आर्मी स्पेस इंजीनियर्स की होगी, जो एस्टरॉयड को दूर ले जाने की कोशिश करेगी.
इलाके में सबकुछ जलकर खाक-
साइंटिस्ट के मुताबिक, पहले इसके धरती से टकराने की संभावना सिर्फ 1.3 फीसदी थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 2.3 फीसदी कर दिया गया है. अभी यह धरती से हजारों किलोमीटर दूर है, इसलिए जैसे-जैसे यह नजदीक आएगा, खतरा और बढ़ने की संभावना है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके टक्कर से बीच हवा में भयानक विस्फोट होगा. उसके बाद इससे लगभग 8 मिलियन टन टीएनटी ऊर्जा निकलेगी जो हिरोशिमा-नागाशाकी पर गिराए गए परमाणु बमों से भी 500 गुना ज्यादा तबाही मचाएगी. करीब 50 किलोमीटर के इलाके में सबकुछ जलकर खाक हो जायेगा।
कहां गिरेगा, क्या भारत भी जद में
नासा के कैटालिना स्काई सर्वे प्रोजेक्ट के इंजीनियर डेविड रैंकिन जैसे कुछ एक्सपर्ट ने उस संभावित जगह की पहचान की है, जहां ये एस्टरॉयड आकर गिर सकता है. उनके मुताबिक, क्षुद्रग्रह उत्तरी दक्षिण अमेरिका से लेकर प्रशांत महासागर, दक्षिणी एशिया, अरब सागर और अफ्रीका तक फैले क्षेत्र के किसी क्षेत्र में गिरना सकता है. भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इथियोपिया, सूडान, नाइजीरिया, वेनेजुएला, कोलंबिया और इक्वाडोर जैसे देश इसके दायरे में हैं. यानी यह भारत में भी किसी शहर पर गिर सकता है.पूरी दुनिया की नजर
इससे पहले एक और अपोफिस नाम के एक एस्टरॉयड के 2029 में धरती पर टकराने की संभावना जताई गई थी. लेकिन बाद में कुछ बदलाव की वजह से इसके धरती पर टकराने की संभावना को शून्य मान लिया गया. अब कहा जा रहा है कि यह धरती के करीब से गुजरेगा लेकिन टकराएगा नहीं. फिर भी नासा समेत पूरी दुनिया के साइंटिस्ट इस पर नजर रखे हुए हैं.
चीन की क्या तैयारी
चीन को अंदाजा हो गया है कि यह धरती पर टकराएगा, इसलिए उसने अभी से स्पेस एक्सपर्ट की एक आर्मी बनानी शुरू कर दी है. यह अंतरिक्ष से आने वाले इस तरह के खतरों से निपटने के लिए काम करेगी और धरती को बचाने का रास्ता तलाशेगी. चीन ऐसे एस्टरॉयड की दिशा बदलने की कोशिशों में भी जुटा है. उसने एस्टॉयड वार्निंग नेटवर्क बनाया है, जो ऐसी चीजों पर पल-पल की नजर रखते हैं. चीन इसका डेटा पूरी दुनिया से शेयर करता है.