नई दिल्ली 16 फरवरी । यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में उनकी पैरवी पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के बेटे और वरिष्ठ वकील अभिनव चंद्रचूड़ कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने कानूनी और डिजिटल जगत में नई हलचल मचा दी है।
रणवीर अल्लाहबादिया, जिन्हें “BeerBiceps” के नाम से भी जाना जाता है, एक लोकप्रिय यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उनके खिलाफ एक विवादास्पद बयान या कंटेंट को लेकर मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उनके वीडियो या पोस्ट से किसी विशेष वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंची है, जिसके चलते उन पर आईटी एक्ट और अन्य कानूनी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
हालांकि, रणवीर ने इन आरोपों को गलत बताते हुए एफआईआर को चुनौती देने का फैसला किया और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
अभिनव चंद्रचूड़: एक प्रतिष्ठित वकील
रणवीर का केस लड़ने वाले अभिनव चंद्रचूड़ एक जाने-माने वकील और संवैधानिक विशेषज्ञ हैं। वे पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के बेटे हैं और सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी कर चुके हैं।
उनका कानूनी करियर संवैधानिक कानून, मीडिया कानून, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल मामलों से जुड़े केसों में खास रहा है। रणवीर का केस लेने से यह साफ है कि यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम कानून व्यवस्था के नजरिए से भी महत्वपूर्ण हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या होगी रणवीर की दलील?
रणवीर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मुख्य दलीलें होंगी:
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन: उनके वीडियो या पोस्ट का उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था, बल्कि यह व्यक्तिगत विचार और सूचना साझा करने का एक जरिया था।
- आईटी एक्ट और अन्य धाराओं का दुरुपयोग: उनके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत दर्ज मामला उचित नहीं है और यह डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ सेंसरशिप का मामला बन सकता है।
- मनमानी कार्रवाई: एफआईआर में लगाए गए आरोपों को अनावश्यक और बेबुनियाद बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की जाएगी।
डिजिटल क्रिएटर्स के लिए क्या संकेत?
यह मामला उन यूट्यूबर्स, इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी अहम है, जो सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट रणवीर के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो यह डिजिटल स्पेस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को और मजबूत कर सकता है।
रणवीर अल्लाहबादिया केस अब कानूनी और डिजिटल स्वतंत्रता का बड़ा मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट में इस पर क्या फैसला आता है, यह देखना दिलचस्प होगा। वहीं, अभिनव चंद्रचूड़ की पैरवी इस मामले को और भी गंभीर और हाई-प्रोफाइल बना रही है।