दिल्ली 19 फरवरी – विश्वविद्यालयों से ग्रेजुएट लगभग 50% युवा बेरोज़गार हैं उनके हाथ कोई नौकरी नहीं हैं
जिसको लेकर भारत की नाक कटाई होती रही हैं
की भारत में सबसे ज्यादा युवा हैं पर लगभग बेरोज़गार हैं हर साल करोड़ो की संख्या में अलग – अलग विश्वविद्यालयों से युवा अपनी ग्रेजुएशन
की डिग्री के साथ कम्पनियो के दरवाज़े खटखटा रहे हैं पर आलम यह हैं की उनमे से हर तीसरा बेरोज़गार हैं जोकि आज के समय में चिंता का विषय हैं
हर साल अलग -अलग संकाय से पढ़कर बच्चे आ तो रहे हैं पर माना जा रहा हैं की उनमे प्रतिभा की कमी हैं जिसके कारन रोज़गार नहीं मिल प् रहा हैं।
क्या कहती हैं इंडिआज़ ग्रेजुएट स्किल इंडेक्स –
इंडिआज़ ग्रेजुएट स्किल इंडेक्स का मानना हैं की भारत में केवल 42%6 . युवा ही रोज़गार पाने के लायक हैं केवल इतने ही युवा प्रतिभा रखते हैं
और उनमे काम करने की सूझ – बुझ हैं जिसके कारन ज्यादातर युवा को बेरोज़गारी का मुँह देखना पर रहा हैं और हालत तो ऐसी हैं की कई ऐसे युवा भी हैं
जो नौकरी कर तो रहे हैं पर प्रतिभा के साथ अपडेट नहीं रहने से उन्हें ले- ऑफ़ की तलवार उनके नौकरी पर लटक रही हैं और उनको परेशानी का सामना करना पर रहा है जिसके कारन कंपनियों का कहना हैं की जिन युवाओ में स्किल हैं नौकरी पर उन्हें ही रखा जा सकता हैं और जो प्रतिभाहिन हैं उन्हें कैसे जिम्मेदारी दी जाए और कैसे उनपर भरोसा कर कंपनियों के फ्यूचर को खतरे में डाला जाए।
कंपियों में सही ढंग से काम नहीं होने के कारण कंपनियां अब कर्मचारियों से मुँह मोड़ रही हैं क्यूंकि उनमे वो बात नहीं हैं जो काम AI बेहद कम समय
में करती हैं वैसे आज के युवा नहीं कर पा रहे हैं जिसके कारन उनकी नौकरियां खत्म हो रही हैं और परेशानी बढ़ रही हैं आधुनिक मशीनों का प्रयोग करके
कम्पनिया काम सही ढंग से कर अपनी साख बनाये रखी हैं पर युवा के लिए AI सौतन का काम कर रही हैं और युवाओं का मानना हैं की AI के कारन उनकी नौकरी खतरे में आ गयी हैं और उनको बेरोज़गारी जैसे समस्याओं से गुज़रना पर रहा हैं।