
तबादलों ने लोगों को चौंका दिया है।
गुरुग्राम, 19 फरवरी: हरियाणा प्रदेश में नगर निगम और नगर पालिका के चुनावों के दौरान जहां-जहां चुनाव आचार संहिता लागू है, वहां कई अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले हो रहे हैं। यह तबादले ऐसे समय में हो रहे हैं जब चुनाव आचार संहिता लागू होनी चाहिए थी, और इस पर सवाल उठने लगे हैं। खासकर गुरुग्राम और मानेसर में इन तबादलों ने लोगों को चौंका दिया है।
गुरुग्राम जिले में मानेसर नगर निगम और गुरुग्राम नगर निगम के चुनाव चल रहे हैं। इस बीच कई अधिकारी और कर्मचारी अपने नए पदों पर ताबड़तोड़ ज्वाइन कर रहे हैं। स्थानीय लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि यह चुनाव आचार संहिता के दौरान किया जा रहा है, और बिना चुनाव आयोग की अनुमति के इन तबादलों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का विरोध और शिकायतें
गुरुग्राम के रमेश ने इस स्थिति पर विरोध जताया और कहा कि यह चुनाव आचार संहिता नहीं हो सकती, जब अधिकारी बिना चुनाव आयोग की अनुमति के कर्मचारियों और अधिकारियों को इधर-उधर तबादला कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे इस मुद्दे को हरियाणा के मुख्यमंत्री और चुनाव आयोग के समक्ष उठाने की योजना बना रहे हैं। रमेश ने यह भी कहा कि चुनाव आचार संहिता के दौरान यदि सरकार को लगता है कि किसी विशेष अधिकारी की मौजूदगी जरूरी है, तो उसे चुनाव आयोग से अनुमति लेकर ही स्थानांतरण करना चाहिए, लेकिन यहां तो ऐसा कोई औपचारिक कदम नहीं उठाया गया।
पूर्व सैनिक और आरटीआई कार्यकर्ता रमेश यादव का बयान
मानेसर के पूर्व सैनिक और आरटीआई कार्यकर्ता रमेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाया। उनका कहना था कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार को अगर किसी अधिकारी के स्थानांतरण की आवश्यकता होती है, तो उसे चुनाव आयोग से अनुमति लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव आचार संहिता का पालन दिखाने के लिए अन्य कई कार्य हो रहे हैं, लेकिन अधिकारी इस नियम का उल्लंघन कर रहे हैं।
आधिकारिक नियमों पर सवाल
राजेश कुमार, एक स्थानीय निवासी ने बताया कि हरियाणा सरकार के नियमों के अनुसार, किसी अधिकारी को तीन साल तक एक ही स्थान पर काम करने के बाद तबादला किया जाता है। लेकिन गुरुग्राम में कुछ अधिकारियों को तो इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। वे अपनी उच्च अधिकारियों से सांठगांठ कर गुरुग्राम में अपनी पोस्टिंग को लेकर फिर से स्थानांतरित हो जाते हैं। यह एक आम समस्या बन चुकी है, जिसमें अधिकारी चुनाव आचार संहिता के बावजूद अपनी सुविधा के अनुसार पदस्थापन बदलते हैं।
गुरुग्राम में अधिकारियों की ताबड़तोड़ पोस्टिंग
गुरुग्राम में यह एक आम बात बन चुकी है कि जब अधिकारी किसी स्थान पर कुछ समय के लिए स्थानांतरित होते हैं, तो बाद में वे फिर से किसी उच्च पद पर गुरुग्राम में लौट आते हैं। इस प्रक्रिया को लेकर स्थानीय लोग गुस्से में हैं, और उनका कहना है कि यह स्थिति चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के समान है, जो चुनाव आयोग और सरकार की नजरों से बचकर हो रहा है।
इस प्रकार, गुरुग्राम में चुनाव आचार संहिता का पालन नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं, और स्थानीय लोग चुनाव आयोग और सरकार से इस पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि यदि आचार संहिता लागू है, तो इसके नियमों का सही तरीके से पालन किया जाना चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर कोई प्रश्नचिन्ह न लगे।