कैलाश विजयवर्गीय का बयान चर्चा में, छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिया विवादित तर्क!
मध्यप्रदेश 20 फरवरी -मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं।
उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के योगदान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि शिवाजी महाराज नहीं होते, तो उनका नाम ‘कलीमुद्दीन’ होता। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है।
क्या कहा कैलाश विजयवर्गीय ने?
कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में छत्रपति शिवाजी महाराज को हिंदू धर्म और संस्कृति के रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “यदि छत्रपति शिवाजी महाराज नहीं होते, तो हम सबका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता। मेरा नाम कैलाश विजयवर्गीय नहीं होता, बल्कि कलीमुद्दीन होता।”
उन्होंने दावा किया कि शिवाजी महाराज के पराक्रम और दूरदर्शिता के कारण ही भारत में हिंदू संस्कृति की रक्षा हो पाई। उनके अनुसार, शिवाजी महाराज ने मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों के खिलाफ संघर्ष कर भारत को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने में मदद की।
बयान पर विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने इसे अनावश्यक और भड़काऊ बताया। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश की जा रही है और इस तरह के बयानों से समाज में गलत संदेश जाता है।
वहीं, बीजेपी के कई नेताओं ने विजयवर्गीय के बयान को शिवाजी महाराज की वीरता के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति बताया। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने केवल यह बताने की कोशिश की कि शिवाजी महाराज ने किस तरह भारत की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखा।
शिवाजी महाराज का ऐतिहासिक योगदान
छत्रपति शिवाजी महाराज को मराठा साम्राज्य के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने मुगलों के खिलाफ संघर्ष किया और स्वराज की अवधारणा को मजबूत किया। उनका प्रशासनिक कौशल और युद्धनीति आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
कैलाश विजयवर्गीय का बयान एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। शिवाजी महाराज का योगदान भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी से ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर विवाद उत्पन्न होना आम हो गया है। अब देखना होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है।