दिल्ली 21 फरवरी -दिल्ली की नव-निर्वाचित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।
उन्होंने पूर्व सरकार के सभी नॉन-ऑफिशियल स्टाफ की सेवाएं समाप्त करने का निर्देश दिया है। इस निर्णय के तहत, इन सभी कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में रिपोर्ट करने के आदेश दिए गए हैं।
सरकारी खर्चों में कटौती करना-
सरकार के इस कदम का उद्देश्य सरकारी खर्चों में कटौती करना और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी विभागों से उन नॉन-ऑफिशियल स्टाफ की सूची भी मांगी है, जिन्हें पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान नियुक्त किया गया था। यह फैसला सरकारी तंत्र को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
पदों को समाप्त करने के लिए यह निर्णय-
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह पाया गया था कि पूर्व सरकार के दौरान कई गैर-सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी, जिनकी आवश्यकता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे थे। इन कर्मचारियों के कार्यों की समीक्षा करने और सरकारी तंत्र में गैर-जरूरी पदों को समाप्त करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
प्रशासनिक सुधार के लिए लिया गया है-
विपक्षी दलों ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। उनका कहना है कि कई अनुभवी नॉन-ऑफिशियल कर्मचारी सरकार के सुचारू संचालन में मदद कर रहे थे और उन्हें हटाने से प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह फैसला किसी भी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार के लिए लिया गया है।
उद्देश्य से यह फैसला लिया गया-
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार के खर्चों में कमी लाने और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने में सहायक होगा। सरकारी विभागों में अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति और उनके वेतन पर खर्च होने वाले सरकारी धन को नियंत्रित करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है।
उपयोग सुनिश्चित होगा और अनावश्यक खर्चों पर लगाम-
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता देगी। उन्होंने कहा कि सभी विभागों में कार्यरत स्टाफ की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और केवल आवश्यक कर्मचारियों को ही रखा जाएगा। इससे सरकारी संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा और अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल-
इस निर्णय से सरकारी व्यवस्था में कितने बड़े बदलाव होंगे, यह तो आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन फिलहाल इस फैसले ने दिल्ली की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।