हाथरस 21 फरवरी – उत्तर प्रदेश सरकार ने हाथरस भगदड़ मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी दे दी है।
इस रिपोर्ट में प्रसिद्ध धार्मिक गुरु भोले बाबा (नारायण साक्षी) को किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। साथ ही, पुलिस की कार्रवाई को भी उचित ठहराया गया है। इस त्रासदी में 121 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद राज्यभर में तनाव की स्थिति बन गई थी, और सरकार की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे।
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
न्यायिक जांच आयोग ने विस्तृत रिपोर्ट में यह निष्कर्ष दिया है कि भगदड़ के लिए कोई एक व्यक्ति या संस्था पूरी तरह जिम्मेदार नहीं है। आयोग ने भीड़ प्रबंधन की खामियों और सुरक्षा उपायों की कमी को स्वीकार किया, लेकिन किसी पर भी प्रत्यक्ष रूप से आरोप नहीं लगाया। रिपोर्ट के अनुसार, आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई और भगदड़ मच गई। हालांकि, इसमें किसी भी व्यक्ति या संगठन को दोषी नहीं ठहराया गया है।
भोले बाबा को क्लीन चिट
घटना के बाद बाबा नारायण साक्षी, जिन्हें भोले बाबा के नाम से जाना जाता है, पर भीड़ नियंत्रण में लापरवाही के आरोप लगे थे। लेकिन न्यायिक जांच आयोग ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि आयोजन के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और पुलिस की थी, न कि आयोजकों या धार्मिक गुरु की।
पुलिस कार्रवाई को ठहराया गया उचित
घटना के बाद पुलिस प्रशासन पर भी लापरवाही के आरोप लगे थे। लेकिन आयोग ने पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि हालात को देखते हुए उन्होंने जो कदम उठाए, वे उचित थे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए पुलिस और प्रशासन को भीड़ प्रबंधन के नए उपाय अपनाने होंगे।
न्यायिक जांच आयोग ने इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं। इनमें धार्मिक आयोजनों के लिए भीड़ नियंत्रण की ठोस योजना बनाना, सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाना और स्थानीय प्रशासन को अधिक सतर्क रहने की हिदायत देना शामिल है।
हालांकि, पीड़ितों के परिजनों और कई संगठनों ने इस रिपोर्ट पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि दोषियों को सजा देने के बजाय सभी को क्लीन चिट दे दी गई, जिससे न्याय की उम्मीद धूमिल हो गई है। अब देखना होगा कि इस रिपोर्ट पर विधानसभा में क्या प्रतिक्रिया आती है और सरकार आगे क्या कदम उठाती है।