महाराष्ट्र 22 फरवरी -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन में कहा
कि यह सम्मेलन भारत की आजादी की लड़ाई का सार है। उन्होंने मराठी साहित्य की समृद्ध परंपरा और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने मराठी साहित्यकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने समाज में जागरूकता फैलाने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि मराठी साहित्य ने न केवल सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध किया है, बल्कि सामाजिक सुधारों और स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने मराठी साहित्यकारों से आग्रह किया कि वे अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ आवाज उठाएं और समाज को प्रगति की ओर ले जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि मराठी भाषा और साहित्य ने भारतीय साहित्य को समृद्ध किया है और इसे वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री ने मराठी साहित्य सम्मेलन के आयोजकों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन मराठी साहित्य के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में मराठी साहित्य के महान लेखकों और कवियों का उल्लेख किया, जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाई और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इन महान साहित्यकारों की रचनाएं आज भी हमें प्रेरणा देती हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए मार्गदर्शन करती हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि मराठी साहित्य सम्मेलन जैसे आयोजन साहित्यकारों, पाठकों और समाज के बीच एक सेतु का काम करते हैं, जिससे साहित्य और समाज के बीच संवाद स्थापित होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन से मराठी साहित्य को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
अंत में, प्रधानमंत्री मोदी ने मराठी साहित्यकारों से आग्रह किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में एकता, भाईचारा और समरसता का संदेश फैलाएं और देश की प्रगति में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि साहित्य की शक्ति से हम समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर कर सकते हैं और एक समृद्ध और सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।