चंडीगढ़ 22 फरवरी – दिल्ली चुनाव में हार के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) की नेतृत्व वाली पंजाब सरकार एक्शन मोड में है। सरकार ने विजिलेंस चीफ को हटाने और मुक्तसर साहिब डीसी को सस्पेंड करने के बाद अब राज्य के 232 अधिकारियों से इस्तीफा मांग लिया है।
एक साल के लिए होती है नियुक्ति
सरकार के पांच बड़े फैसले
पंजाब ) सरकार द्वारा करीब 232 अधिकारियों से इस्तीफा मांगा गया है। इन सभी कानून अधिकारियों को हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल में राज्य का पक्ष रखने के लिए नियुक्त किया गया है। वहीं, सरकार ने 7 दिनों में अब तक पांच बड़े फैसले लिए हैं।
एक साल के लिए होती है नियुक्ति
पंजाब के एडवोकेट जनरल (एजी) गुरमिंदर सिंह का कहना है कि यह सब कुछ एक तय प्रक्रिया का हिस्सा है। क्योंकि इन अधिकारियों की नियुक्ति एक साल के लिए होती है। फरवरी माह में भी इनकी नियुक्ति समाप्त हो रही है। सरकार का उद्देश्य कार्यालय के कार्यों को व्यवस्थित और सुदृढ करना है।
एजी गुरमिंदर सिंह के मुताबिक पंजाब के नागरिकों के हितों को प्रभावी बनाया जा सकेंस इसके लिए यह प्रक्रिया है। यह प्रक्रियागत कदम विधि अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति को सुगम बनाने तथा कानूनी प्रतिनिधित्व में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सरकार के पांच बड़े फैसले
14 फरवरी – सरकार ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए आदेश दिए थे कि डीसी, एसडीएम, एसएसपी और एसएचओ भ्रष्टाचार रोके, वरना उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
17 फरवरी – सरकार ने सबसे पहले पंजाब विजिलेंस चीफ स्पेशल डीजीपी वरिंदर कुमार को हटाकर उनकी जगह एडीजीपी जी नागेश्व को जिम्मेदारी सौंपी थी। इसी दिन मुक्तसर साहिब के डीसी को भ्रष्टाचार मिलने के बाद सस्पेंड किया गया। साथ ही उनके खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू करने के आदेश दिए है।
19 फरवरी – पंजाब सरकार की तरफ से करप्शन में शामिल 52 पुलिस मुलाजिमों को बर्खास्त किया गया था। यह सारे भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल थे।
21 फरवरी – सरकार ने 21 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर किए। इनमें जालंधर के पुलिस कमिश्नर समेत नौ जिलों के एसएसपी शामिल थे।
21 फरवरी – पंजाब सरकार की तरफ प्रशासनिक सुधार विभाग को खत्म कर दिया। कैबिनेट मंत्री कुलदीप धालीवाल सिर्फ एक ही विभाग के मंत्री रह गए।