
भाजपा की दिल्ली जीत से हरियाणा के राजनीतिक दलों में मायूसी
नई दिल्ली, 26 फरवरी – हरियाणा में नगर निगम चुनाव जोरों पर हैं, लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) चुनावी मैदान में मजबूती से उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सके। भाजपा के मुकाबले में विपक्षी दल मेयर और पार्षद पदों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने में नाकाम साबित हुए हैं।
कांग्रेस पार्टी की बात करें तो पूरे हरियाणा में कुछ ही स्थानों पर उसने मेयर पद के लिए उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन पार्षद पदों पर चुनाव लड़ने के लिए उसे उम्मीदवार नहीं मिल पाए। पार्टी के कई पदाधिकारी और समर्थक भी कांग्रेस की टिकट लेने से घबराते नजर आए, जिसके चलते अधिकतर स्थानों पर कांग्रेस के उम्मीदवार ही नहीं हैं। सिर्फ गुरुग्राम और मानेसर में कांग्रेस अपने मेयर प्रत्याशी घोषित कर पाई, लेकिन पार्षद चुनाव में वह भी असफल रही।
जेजेपी और इनेलो पूरी तरह चुनावी मैदान से बाहर
हरियाणा की राजनीति में एक समय मजबूत पकड़ रखने वाली जेजेपी इस बार पूरी तरह नगर निगम चुनाव से गायब नजर आ रही है। भाजपा के साथ 4.5 साल तक सत्ता में साझेदारी करने वाली दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी ने न तो मेयर पद पर उम्मीदवार उतारे और न ही पार्षद के लिए। इसे राजनीतिक कमजोरी माना जाए या भाजपा के साथ अघोषित गठबंधन, इस पर राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं।
वहीं, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रमुख अभय सिंह चौटाला भी अपनी पार्टी को चुनाव में सक्रिय नहीं कर पाए। जो पार्टी भाजपा सरकार को घेरने की बातें करती थी, वह खुद इस चुनाव में कोई दम नहीं दिखा पाई। इनेलो का कोई भी प्रत्याशी नगर निगम या नगर पालिका चुनावों में नहीं दिख रहा है। इसे हार का डर माना जाए या भाजपा सरकार से भीतर ही भीतर नजदीकियां, यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है।
हरियाणा में विपक्ष की कमजोर स्थिति
हरियाणा में कांग्रेस और भाजपा दो प्रमुख राजनीतिक ताकतें हैं, लेकिन पिछले 13 वर्षों में कांग्रेस लगातार कमजोर होती गई है। पार्टी की राष्ट्रीय नेतृत्व भी हरियाणा कांग्रेस के कुछ नेताओं पर भरोसा नहीं जता रहा है। इसी वजह से कांग्रेस अब तक हरियाणा में विपक्ष का नेता तक तय नहीं कर पाई है।
दूसरी ओर, जेजेपी और इनेलो भी अपनी राजनीतिक साख को मजबूत नहीं कर पाए। जेजेपी, जो पिछली भाजपा सरकार में उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंची थी, इस बार हिम्मत नहीं जुटा पाई कि वह नगर निगम और नगर परिषद चुनाव में अपने प्रत्याशी उतार सके।
भाजपा की बढ़ती पकड़
भाजपा लगातार छोटे-बड़े सभी चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। चाहे विधानसभा चुनाव हो, लोकसभा चुनाव हो, या फिर नगर निगम और नगर पालिका चुनाव, हर जगह भाजपा का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। पार्टी के मजबूत संगठन, आरएसएस के कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की लोकप्रियता भाजपा के पक्ष में जाती दिख रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की लगातार बढ़ती ताकत के सामने विपक्ष बिखरता जा रहा है। यह विपक्षी दलों के लिए चिंता की बात है कि न सिर्फ केंद्र बल्कि राज्य स्तर पर भी भाजपा का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। क्या यह विपक्ष का डर है या फिर भाजपा की लोकप्रियता का असर, यह राजनीतिक पंडित ही सही ढंग से बता सकते हैं।
अब देखना होगा कि हरियाणा में नगर निगम चुनाव के नतीजे किस ओर इशारा करते हैं। क्या भाजपा अपनी पकड़ बनाए रखेगी, या विपक्ष कोई चमत्कार करेगा, इसका फैसला 2 मार्च को चुनाव परिणाम आने के बाद ही होगा।