
हरियाणा नगर निगम चुनाव: प्रचार का अंतिम दौर,
गुरुग्राम, 27 फरवरी: हरियाणा में 2 मार्च को होने वाले नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद चुनावों के लिए अब गिनती के मात्र दो दिन बचे हैं। प्रचार के आखिरी दौर में सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रोहतक से सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा आज गुरुग्राम पहुंच रहे हैं। वे कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार करेंगे और विरोधी दलों पर तीखे हमले बोलेंगे।
गुरुग्राम और मानेसर में दिलचस्प मुकाबला
गुरुग्राम नगर निगम चुनाव में भाजपा मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, लेकिन असली घमासान मानेसर नगर निगम में देखने को मिल रहा है। यहां भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। इस चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री नायक सिंह सैनी, उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पूरी ताकत झोंक चुके हैं।
कांग्रेस प्रचार में पिछड़ी, अब आखिरी समय में दिखाई सक्रियता
कांग्रेस पार्टी अब तक नगर निगम चुनाव में अपेक्षाकृत सुस्त नजर आई थी। लेकिन अब अंतिम समय में दीपेंद्र हुड्डा को प्रचार में उतारकर कांग्रेस अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक भिवानी ने जानकारी दी कि दीपेंद्र हुड्डा गुरुग्राम के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करेंगे।
भाजपा के आक्रामक प्रचार के सामने कांग्रेस की चुनौती
भाजपा की ओर से नगर निगम चुनाव के लिए कई बड़े आयोजन किए गए हैं, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता लगातार सभाएं कर रहे हैं। इसके विपरीत कांग्रेस के बड़े नेता अब तक सक्रिय नहीं दिखे, जिससे पार्टी कमजोर स्थिति में नजर आ रही थी। कांग्रेस प्रत्याशियों ने भी कई बार नेतृत्व की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठाए। लेकिन अब दीपेंद्र हुड्डा की एंट्री से कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की उम्मीद की जा रही है।
कांग्रेस के लिए यह चुनाव क्यों अहम?
नगर निगम चुनाव न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हैं, छोटे चुनावों में हार-जीत से पार्टियों के जनाधार का अंदाजा लगाया जाता है। अगर कांग्रेस यहां अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती, तो उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या कांग्रेस आखिरी समय में बाजी पलटेगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस अंतिम प्रचार अभियान के जरिए भाजपा की बढ़त को चुनौती दे पाएगी, या फिर यह महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा?
अब सबकी नजरें 2 मार्च के मतदान और 12 मार्च की मतगणना पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि गुरुग्राम और मानेसर में जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है।