
हरियाणा में नगर निगम चुनाव: 2 मार्च को होगा मतदान,
चंडीगढ़, 27 फरवरी: हरियाणा में नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों के चुनाव के लिए मतदान 2 मार्च को होगा। अब चुनाव में मात्र दो दिन शेष रह गए हैं, और सभी प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस अपने-अपने चुनाव चिन्हों पर मैदान में डटी हुई हैं और कार्यकर्ताओं को पूरी सक्रियता से जुटने का निर्देश दिया गया है।
गुरुग्राम और मानेसर पर टिकीं निगाहें
इस चुनाव में सबसे दिलचस्प मुकाबला गुरुग्राम और मानेसर नगर निगम चुनावों में देखने को मिल रहा है। भाजपा गुरुग्राम नगर निगम में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है, लेकिन मानेसर नगर निगम में स्थिति अभी भी असमंजस भरी बनी हुई है।
मानेसर चुनाव को लेकर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री नायक सिंह सैनी, उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष खुद चुनावी प्रचार में जुटे हुए हैं। भाजपा की कोशिश है कि मानेसर नगर निगम को भी अपने कब्जे में किया जाए।
कांग्रेस का चुनाव में प्रभावहीन प्रदर्शन
मानेसर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की स्थिति कमजोर नजर आ रही है। कांग्रेस के बड़े नेता प्रचार अभियान से पूरी तरह नदारद हैं। केवल एक दिन के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुरुग्राम में दिखाई दिए, लेकिन मानेसर में पार्टी का कोई भी बड़ा चेहरा प्रचार करता नजर नहीं आया।
इस निष्क्रियता से ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस मतदान और परिणाम से पहले ही हार मान चुकी है। पार्टी की यह निष्क्रियता कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी प्रभावित कर सकती है।
क्षेत्रीय दल चुनावी मैदान से गायब
हरियाणा के क्षेत्रीय दलों (इनेलो और जेजेपी) ने इस चुनाव में अपने उम्मीदवार तक नहीं उतारे। इसके पीछे दो संभावित कारण हो सकते हैं—
- भाजपा के बढ़ते जनाधार से उनका डर।
- पार्टी कार्यकर्ताओं की चुनाव लड़ने में अरुचि।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे चुनावों में हार क्षेत्रीय दलों की जमीनी पकड़ को कमजोर कर सकती है। इसलिए उन्होंने खुद को इस मुकाबले से अलग रखना ही उचित समझा।
चुनाव प्रचार के अंतिम दो दिन महत्वपूर्ण
अब जब मतदान में केवल दो दिन शेष हैं, तो प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं को रिझाने में लगे हुए हैं। इस दौरान प्रत्याशी रूठे हुए मतदाताओं को मनाने और अंतिम समय पर वोट सुनिश्चित करने में व्यस्त रहेंगे।
मानेसर में मुख्य मुकाबला निर्दलीय और भाजपा उम्मीदवारों के बीच बताया जा रहा है। कांग्रेस की निष्क्रियता से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि पार्टी छोटे चुनावों में भी अपना प्रभाव खोती जा रही है।
कौन मारेगा बाजी?
अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा अपनी रणनीति से मानेसर पर भी कब्जा कर पाएगी, या निर्दलीय उम्मीदवार उसे कड़ी टक्कर देंगे? कांग्रेस की निष्क्रियता पार्टी के लिए कितना नुकसानदायक साबित होगी, यह भी 2 मार्च के मतदान के बाद साफ हो जाएगा।