
गुरुग्राम, 28 फरवरी 2025: हरियाणा में भाजपा के लिए मानेसर नगर निगम चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। पार्टी के केंद्रीय और राज्य स्तर के नेता इसे जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, लेकिन दक्षिणी हरियाणा के दिग्गज नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की दूरी से भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
राव इंद्रजीत सिंह, जो गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र के सांसद भी हैं, इस चुनाव में सक्रिय नहीं दिख रहे हैं। इसका सीधा असर मानेसर और गुरुग्राम नगर निगम के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। सूत्रों की मानें तो राव भाजपा के टिकट वितरण से नाखुश हैं, क्योंकि उनकी सिफारिशों को दरकिनार कर पार्टी ने अन्य नेताओं की पसंद को प्राथमिकता दी।
मानेसर में भाजपा प्रत्याशी से राव समर्थक दूर
मानेसर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने सुंदर सरपंच को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है, जो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी माने जाते हैं। पार्टी के ये दोनों वरिष्ठ नेता मानेसर में लगातार जनसभाएं कर रहे हैं और मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं।
लेकिन दूसरी ओर, राव इंद्रजीत सिंह के समर्थक भाजपा उम्मीदवार से दूरी बनाए हुए हैं। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, राव ने पहले डॉ. इंद्रजीत यादव को भाजपा प्रत्याशी बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन पार्टी ने उनकी इस सिफारिश को नजरअंदाज कर दिया। इससे राव नाराज बताए जा रहे हैं। अब उनके समर्थकों के निर्दलीय प्रत्याशी को अंदरखाने समर्थन देने की चर्चा जोरों पर है।
गुरुग्राम में भी सांसद चुनाव प्रचार से नदारद
केवल मानेसर ही नहीं, बल्कि गुरुग्राम नगर निगम चुनाव में भी भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह का कोई खास योगदान नजर नहीं आ रहा है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व तक यह जानकारी पहुंच रही है कि राव इंद्रजीत सिंह पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार नहीं कर रहे हैं।
इस बीच, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और अन्य बड़े भाजपा नेता गुरुग्राम में ताबड़तोड़ जनसभाएं कर रहे हैं। पार्टी की पूरी कोशिश है कि किसी भी तरह भाजपा के प्रत्याशियों को जिताया जाए, लेकिन सांसद का चुनाव से दूरी बनाए रखना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
“पसंद की टिकट नहीं, तो समर्थन भी नहीं”
राजनीति में यह आम बात है कि जब किसी बड़े नेता की सिफारिशों को दरकिनार कर दिया जाता है, तो वह खुद को चुनावी प्रक्रिया से अलग कर लेता है। मानेसर नगर निगम चुनाव में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
राव इंद्रजीत सिंह को उम्मीद थी कि उनकी पसंद का उम्मीदवार भाजपा टिकट पाएगा, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्होंने प्रचार से दूरी बना ली। इससे भाजपा की चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है। पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व इस स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
अगर हार हुई तो जिम्मेदार कौन?
अब बड़ा सवाल यह है कि अगर भाजपा को मानेसर नगर निगम चुनाव में झटका लगता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
अगर भाजपा को जीत मिलती है, तो श्रेय मनोहर लाल खट्टर, नायब सिंह सैनी और हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह को जाएगा। लेकिन अगर हार होती है, तो पार्टी के भीतर इसकी समीक्षा होगी और यह तय किया जाएगा कि राव इंद्रजीत सिंह की नाराजगी ने कितना असर डाला।
अब देखना यह होगा कि चुनाव के नतीजे भाजपा की रणनीति को सही साबित करते हैं
मानेसर और गुरुग्राम में हो रहे चुनाव केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भाजपा के अंदरूनी समीकरणों का भी संकेत देते हैं। अगर पार्टी को मानेसर में हार का सामना करना पड़ता है, तो यह संकेत होगा कि दक्षिणी हरियाणा में राव इंद्रजीत सिंह की अनदेखी भाजपा को भारी पड़ सकती है।
अब देखना यह होगा कि चुनाव के नतीजे भाजपा की रणनीति को सही साबित करते हैं या फिर राव इंद्रजीत सिंह की नाराजगी पार्टी के लिए मुसीबत बन जाती है।