
ऑडियो असली , या फर्जी
नई दिल्ली, 4 मार्च – हरियाणा की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब केंद्रीय राज्य मंत्री और गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत सिंह का एक कथित ऑडियो वायरल हुआ। इस ऑडियो में वे मानेसर नगर निगम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुंदरलाल सरपंच के समर्थन में वोट मांगते सुनाई दे रहे थे। यह ऑडियो मतदान से ठीक एक दिन पहले सामने आया, जिससे भाजपा के भीतर और विपक्षी दलों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
भाजपा के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह ऑडियो असली है, जबकि विपक्ष इसे फर्जी करार दे रहा है। हालांकि, अब यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंच गया है और इसकी जांच की जा रही है। इसके अलावा, हरियाणा सरकार ने भी इस ऑडियो की पड़ताल के आदेश दिए हैं।
राव इंद्रजीत और भाजपा में अंदरूनी कलह?
पसंदीदा उम्मीदवार को टिकट नहीं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राव इंद्रजीत सिंह इस बार मानेसर नगर निगम चुनाव में ज्यादा सक्रिय नहीं थे, क्योंकि भाजपा ने उनके पसंदीदा उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था। यही वजह थी कि वे चुनाव प्रचार में भी ज्यादा नजर नहीं आए। लेकिन मतदान से ठीक एक दिन पहले यह ऑडियो सामने आया, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
सूत्रों के अनुसार, राव इंद्रजीत सिंह ने जिस प्रत्याशी के लिए टिकट मांगा, वह एक ऐसे व्यक्ति की पत्नी हैं, जिसे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अपराधी प्रवृत्ति का बता चुके हैं। इस वजह से भी यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
मुख्यमंत्री और मंत्री भी उठा चुके हैं सवाल
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक जनसभा में स्पष्ट रूप से कहा था कि मानेसर में जिस प्रत्याशी का पति अपराधी गतिविधियों में संलिप्त हैं और इतिहास रहा है। मुख्यमंत्री के साथ हरियाणा सरकार में औद्योगिक मंत्री राव नरबीर सिंह ने भी इस मामले पर खुलकर बयान दिया था।
राव नरबीर सिंह ने कहा, “इस चुनाव में एक तरफ एक शरीफ आदमी खड़ा है और दूसरी तरफ एक गैंगस्टर कि पति। अगर गैंगस्टर को वोट दिया गया, तो जनता को फिरौती भी देनी पड़ेगी।”
अब सवाल यह उठता है कि जब खुद मुख्यमंत्री और उनके मंत्री किसी प्रत्याशी के पति को अपराधी बता रहे थे, तो फिर भाजपा टिकट देने की क्यों पर पैरवी की गई और अगर यह आरोप सही हैं, तो कानून ने उस व्यक्ति के खिलाफ पहले कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
भाजपा का राव इंद्रजीत पर क्या रुख होगा?
इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राव इंद्रजीत सिंह पहले भी पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस कर चुके हैं। मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्हें ज्यादा महत्व नहीं मिला, और अब भी उनकी स्थिति भाजपा में मजबूत नहीं मानी जाती।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह ऑडियो प्रमाणिक पाया जाता है, तो भाजपा के पास दो ही रास्ते बचते हैं— या तो राव इंद्रजीत के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, या फिर इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जाए।
12 मार्च को आएंगे चुनाव परिणाम
हरियाणा की राजनीति में यह मामला अभी और गर्माएगा।
अब सभी की नजरें 12 मार्च को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे समर्थन देती है और यह पूरा विवाद भाजपा के लिए कितना भारी पड़ता है।
इस मामले में आगे क्या होगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि हरियाणा की राजनीति में यह मामला अभी और गर्माएगा।