
प्रशासन मौन,
फार्म हाउस मालिकों का जंगल सफारी को झटका
गुरुग्राम, 6 मार्च: एक तरफ हरियाणा सरकार अरावली क्षेत्र में जंगल सफारी बनाने की योजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर अरावली की पहाड़ियों में अवैध रूप से फार्म हाउसों का निर्माण तेजी से हो रहा है। हरियाणा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (DTP) और स्थानीय प्रशासन पर इन अवैध निर्माणों को रोकने में नाकामी के आरोप लग रहे हैं।
🔹 अवैध निर्माणों पर प्रशासन की लचर कार्रवाई
सरकार और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त आदेशों के बावजूद अरावली क्षेत्र में अवैध निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
- अगर कोई शिकायत करता है, तो डीटीपी विभाग औपचारिकता निभाते हुए सिर्फ कुछ दीवारें गिराकर कार्रवाई का दिखावा करता है।
- लेकिन जैसे ही तोड़फोड़ दस्ता इलाके से बाहर निकलता है, निर्माण फिर से शुरू हो जाता है।
- प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं कि सरकारी अधिकारियों को पहले से ही इन अवैध निर्माणों की जानकारी होती है, लेकिन जब तक शिकायत नहीं होती, तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
🔹 क्यों नहीं टूटते अवैध फार्म हाउस?
अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त करने के बजाय प्रशासन केवल औपचारिकता निभाने में लगा रहता है।
- हर बार सिर्फ बाउंड्री वॉल या गेट गिराकर लीपापोती कर दी जाती है।
- सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद अवैध निर्माण बदस्तूर जारी हैं।
- सवाल उठता है कि आखिर प्रशासन किसके दबाव में काम कर रहा है?
🔹 नेताओं और अधिकारियों के अवैध फार्म हाउस
सूत्रों की मानें तो अरावली क्षेत्र में बनने वाले अधिकतर अवैध फार्म हाउस बड़े नेताओं, नौकरशाहों और रसूखदार लोगों के हैं।
- इनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाती, क्योंकि प्रशासनिक अधिकारी खुद उनके दबाव में होते हैं।
- दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई प्रभावशाली राजनेताओं के भी फार्म हाउस अरावली की पहाड़ियों में तेजी से बन रहे हैं।
- यही वजह है कि इन पर कार्रवाई करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता।
🔹 अवैध निर्माणों पर दोहरा रवैया
टिकरी, सोहना, भोंडसी और अन्य इलाकों में अवैध फार्म हाउस बनाने वालों के बीच आपसी विवाद भी बढ़ रहे हैं।
- हाल ही में भोंडसी पुलिस स्टेशन क्षेत्र में दो अवैध फार्म हाउस मालिकों के बीच दीवार तोड़ने को लेकर टकराव हुआ।
- दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, लेकिन प्रशासन ने उन्हें हटाने की बजाय सिर्फ समझौता कराने की कोशिश की।
📌 जंगल सफारी बनाम अरावली में अवैध कब्जे
सरकार दावा कर रही है कि जल्द ही अरावली में जंगल सफारी विकसित की जाएगी, लेकिन जिस रफ्तार से हरे-भरे जंगलों को उजाड़कर फार्म हाउस बनाए जा रहे हैं, उसे देखते हुए यह सपना अधूरा लगता है।
- सरकार को तय करना होगा कि वह पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना चाहती है या प्रभावशाली लोगों के अवैध कब्जों को।
- अगर अरावली को बचाना है, तो इन अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।