
गुरुग्राम, 6 मार्च: हरियाणा सरकार द्वारा प्रस्तावित जंगल सफारी प्रोजेक्ट को बड़ा झटका लग सकता है।
अरावली की पहाड़ियों में तेजी से बन रहे अवैध फार्म हाउस और कॉटेज, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
🔹 जंगल सफारी की योजना और बढ़ता अवैध कब्जा
हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम और नूंह जिले के 10,000 एकड़ क्षेत्र में जंगल सफारी बनाने की योजना बनाई थी।
- इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देना है।
- लेकिन बड़े-बड़े फार्म हाउसों और निजी रिसॉर्ट्स के निर्माण से जंगल सफारी प्रोजेक्ट पर संकट गहराने लगा है।
- प्रशासन की नाकामी और प्रभावशाली लोगों की साठगांठ से अरावली में जंगल साफ किए जा रहे हैं।
🔹 रसूखदारों के अवैध फार्म हाउस कैसे दे रहे हैं जंगल सफारी को झटका?
1️⃣ वन क्षेत्र में कब्जा:
- अरावली की पहाड़ियों में बिना अनुमति फार्म हाउस बनाए जा रहे हैं।
- पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण से जंगल सफारी के लिए प्रस्तावित क्षेत्र सिकुड़ता जा रहा है।
2️⃣ प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा:
- वन्यजीवों का वास स्थल नष्ट हो रहा है, जिससे वे दूसरी जगहों पर पलायन कर रहे हैं।
- पर्यावरणविदों के अनुसार, अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो जंगल सफारी से पहले ही अरावली बंजर हो जाएगी।
3️⃣ प्रशासन की ढील और लीपापोती:
- शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
- अगर कार्रवाई होती भी है, तो सिर्फ दीवार गिराने या गेट तोड़ने तक ही सीमित रहती है।
- बाद में दोबारा निर्माण शुरू हो जाता है।
🔹 सरकार की गंभीरता पर सवाल
सरकार जहां जंगल सफारी के लिए हजारों करोड़ का निवेश करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की लापरवाही और प्रभावशाली लोगों की दखलंदाजी इस परियोजना को खतरे में डाल रही है।
- एनजीटी के आदेशों का पालन नहीं हो रहा।
- अगर अवैध फार्म हाउसों को हटाया नहीं गया, तो जंगल सफारी केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।
🔹 क्या सरकार कोई कड़ा कदम उठाएगी?
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार जंगल सफारी के सपने को बचाने के लिए इन अवैध फार्म हाउस मालिकों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करती है या नहीं।
अगर प्रशासन ने अब भी लापरवाही बरती, तो जंगल सफारी बनने से पहले ही खत्म हो सकती है।