
राजस्थान में ऐतिहासिक मायरा: भाई ने अपनी बहन के यहां भरा 13 करोड़ 71 लाख का मायरा
जयपुर राजस्थान 6 मार्च। राजस्थान में पारिवारिक प्रेम और समर्पण की एक अनूठी मिसाल पेश की गई है। झुंझुनू जिले के सेखासनी गांव में तुलछाराम और रामलाल फड़ौदा बेदावड़ी वाला ने अपनी बहन के यहां 13 करोड़ 71 लाख रुपये का मायरा भरा। यह अब तक का सबसे भव्य और ऐतिहासिक मायरा माना जा रहा है, जिसने पूरे राज्य में चर्चा का माहौल बना दिया है।
🛕 क्या है मायरा की परंपरा?
राजस्थान में ‘मायरा भरना’ एक पुरानी परंपरा है, जो बहन-भाई के रिश्ते की गहराई और प्रेम को दर्शाती है। इस प्रथा के तहत, भाई अपनी बहन के ससुराल में किसी शुभ अवसर पर भेंट स्वरूप उपहार, नकदी, और अन्य मूल्यवान वस्तुएं देता है। यह परंपरा समाज में भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती और भाई के कर्तव्य को भी दर्शाती है।
💰 मायरे में दिए गए उपहार और संपत्तियां:
इस ऐतिहासिक मायरे में बहन के परिवार को भूमि, नकदी, गहने, वाहन और समाज सेवा के लिए विशेष योगदान दिया गया।
🔹 1 ट्रैक्टर और 1 गाड़ी
🔹 5 किलो चांदी और 1 किलो 60 ग्राम सोना
🔹 6 प्लॉट और 80 बीघा जमीन
🔹 1 करोड़ 31 लाख रुपये नकद (रोकड़)
🔹 गांव की गौशाला में एक बड़ा हॉल निर्माण के लिए दान
🏆 राजस्थान में अब तक का सबसे बड़ा मायरा?
राजस्थान में मायरा भरने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर मायरा भरना पहली बार देखने को मिला है। इससे पहले भी राज्य में कई बार करोड़ों के मायरे की खबरें आई हैं, लेकिन 13.71 करोड़ का मायरा ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़ा बताया जा रहा है।
💡 सामाजिक सेवा और प्रेरणादायक पहल
इस मायरे की खास बात यह भी है कि इसमें न केवल बहन के परिवार को भेंट दी गई, बल्कि गांव और समाज के कल्याण के लिए भी बड़ा योगदान दिया गया।
✅ गांव की गौशाला में एक बड़ा हॉल बनाने के लिए दान दिया गया, जो भविष्य में सैकड़ों गायों के लिए आश्रय बनेगा।
✅ समाज में इस पहल को लेकर एक सकारात्मक संदेश गया कि भाई सिर्फ बहन का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का भी भला सोचता है।
✅ यह मायरा न केवल आर्थिक भेंट थी, बल्कि इसमें सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाई गई।
📢 पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय
इस भव्य मायरे ने पूरे राजस्थान में सुर्खियां बटोरी हैं। गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस अनोखी घटना को लेकर लोग बड़े गर्व और उत्साह से चर्चा कर रहे हैं।
➡️ भाई-बहन के रिश्ते की यह अद्भुत मिसाल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
➡️ समाज में भाई का कर्तव्य और उसकी जिम्मेदारी को दिखाने वाला यह मायरा न केवल बहन की खुशी का कारण बना, बल्कि पूरे गांव के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बन गया।
राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं में भाई-बहन का रिश्ता हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन सेखासनी गांव के इस मायरे ने इसे एक नया आयाम दे दिया है। यह केवल एक पारिवारिक भेंट नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा और परोपकार की मिसाल भी है।
👉 यह मायरा दिखाता है कि जब परिवार और समाज के लिए प्रेम और सम्मान का भाव सच्चा होता है, तो वह एक ऐतिहासिक अवसर बन जाता है।