
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से जवाब की उम्मीद की जा रही है।
क्या गुरुग्राम पुलिस का यह काम सामान्य पुलिसिंग का हिस्सा है
गुरुग्राम, 10 मार्च: दिल्ली-जयपुर हाईवे पर स्थित खेड़की दौला टोल अब एक बड़ा विवाद बन चुका है। यहां पर प्रतिदिन लंबा जाम लगता है, जिससे वाहन चालकों और मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र (आईएमटी) में काम करने वाले कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस टोल का समय वर्ष 2018 में समाप्त हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद यह टोल चालू है और स्थानीय लोग लगातार इसके हटाने की मांग कर रहे हैं।
टोल को लेकर चारों तरफ विरोध और असंतोष का माहौल है। यहां तक कि स्थानीय पंचायतों और टोल संघर्ष समितियों ने भी इसके खिलाफ प्रदर्शन किए हैं, लेकिन टोल हटाने का कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया। इसके परिणामस्वरूप आसपास के सैकड़ों गांवों के लोग हरियाणा और केंद्र सरकार से नाराज हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की नाराजगी
गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र के सांसद और मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी इस टोल को लेकर कई बार नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि इस टोल का समय 2018 में समाप्त हो गया था, लेकिन अब तक यह क्यों जारी है, यह एक बड़ा सवाल है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि इस टोल की वजह से आसपास के क्षेत्र में जाम और ट्रैफिक की समस्या बढ़ गई है। उन्होंने इसे लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है और इसकी समीक्षा की मांग की है।
नेशनल टोल कमेटी का निरीक्षण
हाल ही में नेशनल टोल कमेटी, जिसमें सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी दलों के सांसद शामिल थे, ने खेड़की दौला टोल का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान समिति ने सवाल उठाया कि जब इस टोल का समय 2018 में समाप्त हो गया था, तो अब तक यह क्यों चल रहा है? समिति के सदस्य यह जानने के लिए उत्सुक थे कि इसे किसके इशारे पर जारी रखा गया है और इसके पीछे कौन सी ताकतें हैं।
लोकसभा में गूंजेगा टोल का मुद्दा
विपक्षी सांसदों द्वारा इस मुद्दे पर विरोध जताए जाने के बाद यह संभावना है कि लोकसभा में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से इस मुद्दे पर सवाल पूछे जाएं। यह सवाल उठाया जाएगा कि जब टोल का समय समाप्त हो चुका था, तो क्यों इसे जारी रखा गया है और इस पर क्या कार्रवाई की जाएगी? केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के संज्ञान में यह मामला है और उन्होंने इसे लेकर कुछ कदम उठाने की बात भी की है।
महापंचायतों और विरोध प्रदर्शनों का दौर
इस टोल के खिलाफ कई महापंचायतें आयोजित की जा चुकी हैं। इन महापंचायतों में स्थानीय ग्रामीणों और उद्योगों के कर्मचारी शामिल होते हैं, जो इस टोल की वजह से हर दिन जाम में फंसे रहते हैं। टोल संघर्ष समिति ने भी इस मुद्दे पर विरोध किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि किस प्रभावशाली नेता या मंत्री के दबाव में यह टोल अब तक जारी है।
गुरुग्राम पुलिस की भूमिका
गुरुग्राम पुलिस के जवानों की ड्यूटी खेड़की दौला टोल पर दिन-रात सुरक्षा में तैनात रहती है। यह भी सवाल उठता है कि क्या गुरुग्राम पुलिस का यह काम सामान्य पुलिसिंग का हिस्सा है या फिर यह टोल किसी प्रभावशाली व्यक्ति या मंत्री के समर्थन से चल रहा है। पुलिस को आमतौर पर लोगों की शिकायतें सुनने के लिए वक्त नहीं मिलता, लेकिन इस टोल की सुरक्षा के लिए उन्हें विशेष जिम्मेदारी दी गई है।
क्या है आगे का रास्ता?
खेड़की दौला टोल का मुद्दा अब न केवल स्थानीय जनता के लिए, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक गंभीर विषय बन चुका है। यह देखा जाएगा कि सरकार और संबंधित अधिकारियों द्वारा इस मुद्दे का हल कब तक निकाला जाता है। फिलहाल, टोल पर होने वाला विवाद और स्थानीय जनता का विरोध बढ़ता ही जा रहा है।
सांसद राव इंद्रजीत सिंह और अन्य नेताओं की नाराजगी के बावजूद, टोल का हटाना एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल बन चुका है। अब यह देखना होगा कि लोकसभा में इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया आती है और सरकार इस विवाद का समाधान कैसे निकालती है।
नाराजगी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
खिड़की दौला टोल पर लगातार बढ़ता विरोध, जाम की समस्या और स्थानीय लोगों की नाराजगी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से जवाब की उम्मीद की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों की तरफ से क्या कदम उठाए जाते हैं।