
गुरुग्राम, 13 मार्च –
होली का पर्व भारत सहित विदेशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। हर साल की तरह इस बार भी होलिका दहन पर भद्राकाल का साया रहेगा, जिससे होलिका दहन के समय विशेष महत्व होगा।
होलिका दहन की विशेष प्रक्रिया
होलिका दहन की एक विशिष्ट प्रक्रिया होती है, जिसमें किसी वृक्ष की शाखा को जमीन में गड़ाकर उसे चारों ओर लकड़ी और उपलों से घेरकर गड्ढे में जलाया जाता है। यह विशेष प्रक्रिया निश्चित मुहूर्त में की जाती है, ताकि वह प्रभावशाली और शुभ हो।
इसके बाद, लोग अग्नि को प्रणाम करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। होलिका की आग की राख को घर लाकर, परिवार के सदस्यों को तिलक किया जाता है। यह माना जाता है कि होलिका की राख से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है।
होलिका दहन में विशेष रूप से छेद वाले गोबर के उपले, गेहूं की नई बालियां, और उबटन जलाए जाते हैं। यह मान्यता है कि इन चीजों को जलाने से बुराई का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 11:26 बजे से शुरू होगा और 14 मार्च को, यानी कल रात को 12:30 बजे तक समाप्त होगा। लोग इस समय का अनुसरण करते हुए अपने घरों में होलिका दहन की तैयारियां कर रहे हैं।
होली का रंगोत्सव और उसका महत्व
होलिका दहन के बाद, रंगों से भरी होली की शुरुआत होती है। होली का पर्व अच्छाई की जीत, बुराई का नाश, और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, मिठाइयां खाते हैं और आपस में भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं।
यह पर्व भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हिंदू समाज के लोगों द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है। विशेष रूप से हिंदू समुदाय के लोग विदेशों में भी होली के अवसर पर बड़े आयोजन करते हैं और देशवासियों से जुड़े रहते हैं।
समाज में भाईचारे और प्रेम का संदेश
होली का पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह समाज में प्रेम, भाईचारे, और सामूहिकता का संदेश भी देता है। इस दिन लोग अपनी पुरानी रंजिशें भुलाकर एक-दूसरे से गले मिलते हैं और अपने रिश्तों को मजबूत करते हैं।
इस बार होली का पर्व देशभर में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाएगा, और हर कोई अपने परिवार और समाज में खुशियों का संचार करेगा।होलिका दहन और होली का पर्व भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। यह बुराई के विनाश और अच्छाई की विजय का प्रतीक है। लोग इस दिन को अपनी मानसिक और शारीरिक शुद्धता के रूप में मनाते हैं और परिवार के साथ आनंदित रहते हैं।