
परियोजना बलरामपुर शुगर मिल्स द्वारा विकसित की जाएगी।
लखनऊ, 14 मार्च: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदूषण की रोकथाम और प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने लखीमपुर खीरी जिले के कुनी गांव में लगभग 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बायोप्लास्टिक पार्क स्थापित करने की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना पर लगभग 250 करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है, जिससे आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण में कमी आएगी। यह परियोजना बलरामपुर शुगर मिल्स द्वारा विकसित की जाएगी।
प्रदूषण की समस्या और बायोप्लास्टिक का समाधान
उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में प्रदूषण की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है, और खासतौर पर प्लास्टिक के जलने से होने वाला प्रदूषण बेहद गंभीर है। इस समस्या के समाधान के लिए बायोप्लास्टिक को एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। बायोप्लास्टिक एक प्रकार का प्लास्टिक है जो मक्का, सूरजमुखी, या चुकंदर जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार किया जाता है और यह बायोडिग्रेडेबल होता है, यानी यह प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाता है और पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता।
परियोजना के लाभ और रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना के फायदे के बारे में बताते हुए कहा कि यह बायोप्लास्टिक पार्क केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद नहीं करेगा, बल्कि इससे उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। इस परियोजना के माध्यम से, उत्तर प्रदेश में रोजगार की समस्या में कमी आएगी और प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
नई तकनीकी और उत्तर प्रदेश का नेतृत्व
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि देश में वैज्ञानिक नई-नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश इस तकनीकी का लाभ सबसे पहले उठाएगा। इस परियोजना से उत्तर प्रदेश में न केवल प्रदूषण पर काबू पाया जाएगा, बल्कि राज्य में औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महाकुंभ में लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया और इससे राज्य के सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का राजस्व हुआ, जो उत्तर प्रदेश के विकास में सहायक होगा।
बायोप्लास्टिक का उपयोग पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम
बायोप्लास्टिक का उपयोग पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, क्योंकि यह प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करेगा और पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने में योगदान करेगा। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को पर्यावरणीय दृष्टि से और भी प्रगति करने में मदद करेगा।