
किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया
किसान अब कर्ज के बोझ तले दबे
नई दिल्ली, 14 मार्च 2025:
देश की राजधानी दिल्ली सहित हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हाल ही में हुई भारी बरसात और ओलावृष्टि ने किसानों का मिजाज बिगाड़ दिया है। इन प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया और उनकी फसलें बर्बाद हो गई हैं।
दिल्ली के आसपास के हरियाणा के जिलों जैसे रेवाड़ी, झज्जर, रोहतक, पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल में किसानों की सरसों की फसल ओलावृष्टि से नष्ट हो गई। इसके साथ ही गेहूं और जौ की फसलें भी इस बरसात के चलते खेतों में गिरकर बर्बाद हो गईं। इसके परिणामस्वरूप किसानों की पूरी मेहनत, जो वे महीनों से लगा रहे थे, धराशायी हो गई।
सब्जी की फसल भी बर्बाद
सब्जियों की फसल, जो किसानों के लिए आय का अहम स्रोत होती है, भी इस बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से नष्ट हो गई है। टमाटर, गिया, सरसों और मटर जैसी सब्जियों के फूल खेतों में ही गिर गए, जिससे इनकी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। अब इन सब्जियों की कीमतों में इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि खेतों में फसलें नहीं होने के कारण सब्जियों की उपलब्धता कम हो जाएगी।
महंगाई का खतरा
इन बर्बाद हुई फसलों से एक और समस्या यह उत्पन्न हो सकती है कि घरेलू सब्जियों की कीमतों में वृद्धि होगी, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है। इससे न केवल किसानों, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
किसान परेशान, सरकार की मदद अपर्याप्त
किसान इस समय बहुत घबराए हुए हैं, क्योंकि उनकी रीड की हड्डी खेती होती है, और जब वही बर्बाद हो जाती है, तो उनका जीवन संकट में पड़ जाता है। लगातार हो रही बरसात और ओलावृष्टि ने जहां किसानों की सब्जी की फसल बर्बाद कर दी, वहीं गेहूं और सरसों की फसल भी गिर कर नष्ट हो गई। अब किसान खुद को लूटा हुआ महसूस कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद नहीं है कि उनकी हालत सुधर पाएगी।
सरकार किसानों की बर्बाद फसलों के लिए कुछ सहायता प्रदान करती है, लेकिन यह मदद तब मिलती है जब काफी देर हो चुकी होती है। इस समय किसानों के पास पहले से ही कर्ज होता है, और उनकी फसल बर्बाद होने पर वह और भी कर्ज के तले दब जाते हैं। सरकार की मदद इतनी नहीं होती कि वह किसानों को वास्तविक राहत प्रदान कर सके।
बीज महंगे, कर्ज बढ़ता जा रहा
किसानों के लिए बीज की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, और खेती करने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ता है। जब उन्हें उम्मीद होती है कि उनकी फसल से कुछ आय होगी, तो अचानक ओलावृष्टि जैसी आपदाएं आकर उनकी मेहनत को नष्ट कर देती हैं। यह स्थिति किसानों के लिए बेहद कठिन हो गई है और वे खुद को लूटा हुआ महसूस कर रहे हैं।
कड़ी मेहनत और महीनों की कोशिशें बर्बाद
किसानों के लिए यह समय बहुत कठिन है। उनके द्वारा की गई कड़ी मेहनत और महीनों की कोशिशें बर्बाद हो गई हैं। प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी जिंदगी और भी मुश्किल हो गई है। सरकार से मिलने वाली मदद भी देर से मिलती है और वह इतनी पर्याप्त नहीं होती कि किसानों को वास्तविक राहत मिल सके। किसान अब कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और उनकी स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।