
त्रिवेणी गंगा की सफाई व्यवस्था राम भरोसे
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश 18 मार्च 2025 ,
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही प्रयागराज की सफाई व्यवस्था को लेकर बड़े दावे करे, लेकिन असलियत यह है कि यहां की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। गंगा के त्रिवेणी संगम क्षेत्र में जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु स्नान करने के लिए आते हैं, वहीं उन्हें गंदगी के बीच स्नान करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति प्रशासन की नाकामी को दर्शाती है, जिसके चलते लोग और श्रद्धालु निराश हैं।
प्रशासन की अनदेखी
हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रयागराज को लेकर अक्सर प्रशंसा करते हैं, लेकिन असलियत यह है कि प्रशासनिक अधिकारी यहां पर सफाई व्यवस्था को लेकर पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे हैं। जब न्यू इंडिया न्यूज नेटवर्क की टीम ने प्रयागराज का दौरा किया, तो यह पाया कि गंगा के किनारे स्थित घाटों पर गंदगी के ढेर पड़े हुए हैं और श्रद्धालुओं को गंदगी के बीच स्नान करना पड़ रहा है। यहाँ तक कि घाटों पर खुले में शौच करने की भी स्थिति उत्पन्न हो गई है, क्योंकि वॉशरूम की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
गंगा घाटों पर गंदगी का आलम
प्रयागराज के गंगा घाटों पर जब श्रद्धालु स्नान करने जाते हैं, तो उन्हें गंदगी का सामना करना पड़ता है। यहां पर जल के साथ गंदगी का भी मिश्रण होता है, और यह गंदगी घाटों पर बिखरी हुई होती है। श्रद्धालु इसके बावजूद स्नान करने के लिए मजबूर होते हैं। प्रशासन की ओर से सफाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं की परेशानी और बढ़ रही है। यह स्थिति राज्य सरकार और प्रशासन के लिए शर्मनाक है, क्योंकि यह स्थान देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।
शौचालय की कमी और खुले में शौच की समस्या
यह भी देखा गया कि घाटों पर शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। न तो वहां किसी प्रकार का वॉशरूम है, और न ही शौचालय की कोई व्यवस्था की गई है। हजारों श्रद्धालु जब गंगा स्नान के लिए आते हैं, तो उन्हें खुले में शौच करने की मजबूरी का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति अत्यधिक अस्वच्छ और असहनीय है, जो आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक बुरा अनुभव बन रही है।
लूट और भ्रष्टाचार
इसके अलावा, प्रयागराज में श्रद्धालुओं को लूट और भ्रष्टाचार का भी सामना करना पड़ रहा है। यहां की स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था के तहत श्रद्धालु कई बार अधिक पैसे देने के लिए मजबूर होते हैं, और उनके साथ जेबकटी भी होती है। प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से किसी भी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है, और श्रद्धालुओं से धन वसूली की घटनाएं आम हो चुकी हैं।
मुख्यमंत्री को जानकारी नहीं है?
इन हालात को देखकर यह स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रयागराज की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी नहीं है। अगर वे इस इलाके का वास्तविक निरीक्षण करें, तो उन्हें स्थिति का सही पता चलेगा। यह भी लगता है कि प्रशासन उन्हें सही जानकारी नहीं दे रहा है या फिर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिए गए रिपोर्ट्स सही नहीं हैं।
नागरिकों का आक्रोश
इस प्रकार, प्रयागराज में सफाई और व्यवस्थाओं की बदहाली ने श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों का आक्रोश बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार को गंभीर कदम उठाने चाहिए, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सफाई और अन्य सुविधाएं मिल सकें।प्रयागराज के गंगा घाटों पर सफाई की स्थिति न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि यह राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़ा करती है। प्रशासन यदि इस पर शीघ्र कार्रवाई नहीं करता, तो आने वाले दिनों में यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।