
चण्डीगढ़, 18 मार्च – हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने आज विधानसभा में बजट सत्र के दौरान एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि वर्तमान नीति के अनुसार, यदि किसी ढाणी कनेक्शन को ए.पी. फीडर से आर.डी.एस. फीडर पर स्थानांतरित किया जाता है, तो उसकी लागत आवेदक/लाभार्थी द्वारा वहन की जाती है। इसमें ट्रांसफार्मर की लागत शामिल नहीं होती है।
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि नए ढाणी कनेक्शनों के लिए जहां लाइन की लंबाई फिरनी से 300 मीटर से अधिक और तीन किलोमीटर तक होती है, वहां लाइन की लागत का 50 प्रतिशत और ट्रांसफार्मर की पूरी लागत निगम द्वारा वहन की जाती है। यह कदम बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार लाने के लिए उठाया गया है, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्शन की समस्या का समाधान किया जा सके।
ढाणी की परिभाषा
श्री अनिल विज ने यह भी स्पष्ट किया कि ढाणी के अंतर्गत 10 घरों का समूह होना चाहिए, जिसमें प्रत्येक घर में शौचालय और रसोई की सुविधा होनी चाहिए। हालांकि, इस समूह में टयूबवैल का कमरा नहीं होना चाहिए। यह परिभाषा उन क्षेत्रों में बिजली कनेक्शन देने के लिए इस्तेमाल की जाती है, जहां बुनियादी सुविधाओं की पहुंच अधिक सीमित होती है।
बिजली निगम की स्थिति पर टिप्पणी
उन्होंने आगे कहा कि बिजली निगम की वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है, और निगम पर कुछ देनदारियां भी हैं, जिन्हें समय पर वसूलने की प्रक्रिया चल रही है। श्री विज ने यह भी स्पष्ट किया कि जब निगम की स्थिति ठीक होगी, तब इस संबंध में और अधिक विचार किया जाएगा।
इससे यह संकेत मिलता है कि बिजली निगम के वित्तीय स्थिति को सुधारने के बाद भविष्य में अन्य सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक लाभ हो सके।