
जैन आचार्य लोकेशजी और डॉ. वी.के. सिंह ने इंडो-पैसीफिक शांति सम्मेलन का उद्घाटन किया
इंडो-पैसीफिक क्षेत्र के सभी देशों को शांति स्थापना के लिए एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए – डॉ. वी.के. सिंह
नई दिल्ली, 20 मार्च 2025:
आज अहिंसा विश्व भारती और विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेश जी ने इंडियन इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इंडो-पैसीफिक शांति सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का आयोजन इंडो-पैसीफिक पीस फॉरम (IPPF) और ग्लोबल पीस फाउंडेशन (GPF) द्वारा किया गया था, और इसका विषय था “भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा: विचारों और सोच का महत्व”। यह सम्मेलन दो दिन तक चलेगा और इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए विचारों का आदान-प्रदान करना है।
आवश्यकता है कि हम मिलकर योजनाबद्ध तरीके से शांति और सद्भावना की स्थापना करें।”
उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वल्लन से हुई, इसके बाद IPPF व GPF के चेयरमैन डॉ. मार्कन्डेय राय ने सम्मेलन में उपस्थित जनों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में मिजोरम के राज्यपाल डॉ. विजय कुमार सिंह, कौंफेडेरेशन ऑफ आल इंडियन यूनिवर्सिटीस के अध्यक्ष डॉ. प्रियरंजन त्रिवेदी, भारत में पाकिस्तान के हाई कमिशन साद अहमद वराइच, और अर्जेंटीना के अम्बेसेडर मरियानों अगस्टीन कसिनो ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
आचार्य लोकेश जी ने इस अवसर पर कहा, “भारत, भौगोलिक, आध्यात्मिक और संसाधनों की दृष्टि से, इंडो-पैसीफिक क्षेत्र में शांति और सद्भावना की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभा सकता है। इस क्षेत्र की संस्कृति, ऊर्जा और आर्थिक संसाधन एक दूसरे के अनुकूल हैं। आवश्यकता है कि हम मिलकर योजनाबद्ध तरीके से शांति और सद्भावना की स्थापना करें।” उन्होंने कहा, “विकास के लिए शांति आवश्यक है। जब विकास भौतिकतावाद पर आधारित होता है, तो वह अभिशाप बन सकता है, लेकिन जब विकास के केंद्र में नैतिकता और अध्यात्म होता है, तो वह वरदान बन जाता है।”
आचार्य लोकेश जी ने भारत-प्रशांत क्षेत्र के विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को विश्व शांति केंद्र में इस विषय पर विचार-विमर्श करने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि भारत का प्रथम विश्व शांति केंद्र उद्देश्य है मानवतावादी कार्यों के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना करना।
मिजोरम के राज्यपाल डॉ. वी.के. सिंह ने आचार्य लोकेश जी के सुझाव का स्वागत करते हुए कहा, “इंडो-पैसीफिक क्षेत्र के सभी देशों को एकजुट होकर शांति स्थापना के लिए कार्य करना होगा।” उन्होंने इस क्षेत्र में एकजुटता और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि शांति और स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकें।
इस सम्मेलन ने इंडो-पैसीफिक क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया और इसे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना में योगदान देने का एक महत्वपूर्ण मंच माना जा सकता है।