
पंजाब, 20 मार्च 2025:
पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर से पुलिस ने किसानों को हटाया, जिसके बाद किसानों ने दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह विरोध तब हुआ जब पुलिस ने उन किसानों को बॉर्डर से हटाया, जो इन स्थानों पर कृषि कानूनों और अन्य मांगों को लेकर लंबे समय से धरना दे रहे थे। किसानों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है।
प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली-अमृतसर NH पर बैठकर यातायात अवरुद्ध कर दिया, जिससे सड़क पर गाड़ियां फंसी हुई हैं और यात्री भी परेशान हो रहे हैं। किसानों ने इस आंदोलन को अपनी जमीनी हक की लड़ाई बताया है। उनका कहना है कि उनकी आवाज़ को दबाना और उन्हें जबरदस्ती हटाना गलत है। किसानों की मुख्य मांगें कृषि कानूनों को वापस लेना और किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को हटाना है।
किसानों की मुख्य मांगें:
- कृषि कानूनों का पूरी तरह से विरोध और इन्हें वापस लेने की मांग।
- किसानों को समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने और सरकारी खरीद में पारदर्शिता की मांग।
- किसानों के खिलाफ जमानत की प्रक्रिया और आंदोलन में शामिल किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग।
प्रदर्शन की घटनाएं: पुलिस ने पहले किसानों को शांतिपूर्वक हटाने की कोशिश की थी, लेकिन जब किसान नहीं माने, तो प्रशासन ने उन्हें हटाने के लिए बल का इस्तेमाल किया। इसके परिणामस्वरूप, किसानों ने विरोध स्वरूप दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर धरना शुरू कर दिया, जिससे दोनों दिशाओं में यातायात जाम हो गया।
किसानों ने इस कदम को सरकार की तानाशाही और उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश बताया है। किसानों का कहना है कि सरकार के इन कदमों से उनका मनोबल टूटने वाला नहीं है और वे अपनी न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए आंदोलन जारी रखेंगे। किसानों के नेता ने सरकार से अपील की है कि वे उनकी मांगों पर तत्काल विचार करें और उन्हें खुला मंच दें, ताकि उनके मुद्दों का समाधान हो सके।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया:
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है और राजमार्ग को जल्द से जल्द खाली करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने किसानों से अपील की है कि वे अपना प्रदर्शन शांतिपूर्वक करें और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं को न बढ़ाएं।
इस स्थिति ने पंजाब में किसानों के अधिकारों की रक्षा को लेकर बढ़ते तनाव और संघर्ष को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। किसान आंदोलनों ने पहले भी अपनी ताकत दिखायी है, और अब एक बार फिर वे सड़कों पर उतरे हैं, जिससे सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती सामने आई है।