
देश के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ ने की मांग:
पैराकोट ग्लाइफोसेट की तत्काल बिक्री पर लगे प्रतिबंध- भारतीय किसान संघ
ग्लाइफोसेट की बिक्री मुफ्त में कैंसर परोसना है – मोहिनी मोहन मिश्र
भारत के किसानों को ग्लाइफोसेट जहर परोसने वालों पर कार्यवाही की मांग।
नई दिल्ली, 20 मार्च 2025:
भारत के कृषि क्षेत्र में ग्लाइफोसेट के प्रतिबंध के बावजूद इसके उपयोग का सिलसिला जारी है, जिसके कारण देश में बढ़ते कैंसर, हृदय रोग, त्वचा संक्रमण और पाचन संबंधी गंभीर बीमारियों के रूप में इसके दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने इस बारे में एक पत्र लिखकर मध्यप्रदेश सरकार को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराया है।
भारत में ग्लाइफोसेट की तत्काल बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
इस संबंध में देश के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत में ग्लाइफोसेट की तत्काल बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने अपने बयान में कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 21 अक्टूबर 2022 को स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण ग्लाइफोसेट पर प्रतिबंध लगाने का नोटिफिकेशन जारी किया था। लेकिन, अब तक इसके जहर से बने उत्पादों को किसानों को परोसा जा रहा है। इस पर जांच होनी चाहिए।
ग्लाइफोसेट से खतरा:
ग्लाइफोसेट जैव विविधता के लिए खतरा है और यह जल, मिट्टी और हवा को भी प्रदूषित करता है।
मोहिनी मोहन मिश्र ने आगे कहा कि ग्लाइफोसेट जैव विविधता के लिए खतरा है और यह जल, मिट्टी और हवा को भी प्रदूषित करता है। इसे मुफ्त में कैंसर बांटने जैसा बताया और कहा कि इसके प्रभावों के लिए किसानों को दोषी ठहराना गलत है। भारतीय किसान संघ ने पहले भी ग्लाइफोसेट के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।
ग्लाइफोसेट से बने उत्पादों की बिक्री भारत में चिंताजनक है
उन्होंने कहा, “ग्लाइफोसेट से बने उत्पादों की बिक्री भारत में चिंताजनक है और यह देश के नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए, यह हत्या से भी गंभीर अपराध है।”
ग्लाइफोसेट के स्वास्थ्य पर प्रभाव:
लन, सूजन, त्वचा में जलन, मुंह और नाक में तकलीफ, अप्रिय स्वाद और धुंधली दृष्टि शामिल हैं।
ग्लाइफोसेट से निर्मित उत्पादों के खेती में बढ़ते प्रयोग के कारण दूषित अनाज के सेवन से व्यक्ति को कैंसर, प्रजनन और विकास संबंधी विषाक्तता, न्यूरोटॉक्सिसिटी और इम्यूनोटॉक्सिसिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके लक्षणों में जलन, सूजन, त्वचा में जलन, मुंह और नाक में तकलीफ, अप्रिय स्वाद और धुंधली दृष्टि शामिल हैं।
कृषि के इको सिस्टम के लिए खतरा:
भारतीय किसान संघ का कहना है कि ग्लाइफोसेट के उत्पादों का कृषि क्षेत्र में सभी फसलों पर उपयोग बढ़ रहा है, जो केवल उपज की गुणवत्ता के लिए नहीं बल्कि भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र के इको सिस्टम के लिए भी खतरा बन गया है। यह खेतों और कृषि क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचा रहा है।
35 देशों में ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध:
वर्तमान में करीब 35 देशों ने ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिनमें श्रीलंका, नीदरलैंड, फ्रांस, कोलंबिया, कनाडा, इजरायल और अर्जेंटीना शामिल हैं। भारत में ग्लाइफोसेट को केवल चाय के बागानों और चाय की फसल से जुड़ी गैर-बागान क्षेत्रों में ही इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। अन्य क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल गैरकानूनी है।
भारतीय किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल पर देशभर में पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए ताकि किसान और नागरिक इसके दुष्प्रभाव से बच सकें।