
लखनऊ, लखीमपुर और हमीरपुर जिलों के डीएम रह चुके हैं,
लखनऊ, 21 मार्च: उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड कर दिया गया है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। अभिषेक प्रकाश पर आरोप है कि उन्होंने उद्योगपति से करोड़ों रुपये की फ़ाइल पास करने के लिए 5% कमीशन मांगा था। जब उद्योगपति ने कमीशन देने से इंकार किया, तो उन्होंने फ़ाइल लटकाने का काम किया।
यह मामला तब सामने आया, जब उद्योगपति ने सरकार के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सरकार ने गोपनीय जांच कराई और यह आरोप सही पाए गए। आरोप के मुताबिक, अभिषेक प्रकाश ने यह काम अपने करीबी सहयोगी, बाबू नीकांत जैन, के माध्यम से किया था। बाबू नीकांत जैन को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन अभिषेक प्रकाश को केवल सस्पेंड किया गया है।
अभिषेक प्रकाश का नाम कई बार विवादों में आया है। वह लखनऊ, लखीमपुर और हमीरपुर जिलों के डीएम रह चुके हैं, और इन जिलों में भी उन पर भ्रष्टाचार और बड़े घोटाले करने के आरोप पहले भी लग चुके हैं।
सरकारी दफ्तरों में अपनी पकड़ रखने के लिए चर्चित रहे हैं।
गौरतलब है कि अभिषेक प्रकाश को उत्तर प्रदेश सरकार के चहेते अधिकारियों में माना जाता था और उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। अब इस मामले के बाद उनकी छवि पर सवाल उठ रहे हैं।
नीकांत जैन के बारे में यह बताया जा रहा है कि वह बिहार के रहने वाले हैं और सरकारी दफ्तरों में अपनी पकड़ रखने के लिए चर्चित रहे हैं।
यह मामला सरकारी अधिकारियों की भ्रष्टाचार में संलिप्तता को लेकर सवाल उठाता है और यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है।
यह खबर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचाने वाली हो सकती है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।