
नई दिल्ली, 22 मार्च 2025:
हरियाणा में भाजपा सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद राज्य के सत्ताधारी मंत्री और विधायक अधिकारियों को धमकाने की होड़ में दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति अब इतनी बढ़ गई है कि विधायकों और मंत्रियों द्वारा आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को धमकी दी जा रही है कि वे उन्हें सुधारने का प्रयास करें। हालांकि, ये ही मंत्री और विधायक अपनी ही सरकार में चपरासी तक के तबादले करने में नाकामयाब हो जाते हैं, लेकिन अधिकारियों पर दबाव बनाना और उन्हें धमकाना उनकी आदत बन चुका है।
मंत्री और विधायकों द्वारा अधिकारियों को धमकाना:
हरियाणा के सत्ता में भाजपा के तीसरी बार आने के बाद, अब राज्य के कई मंत्री और विधायक आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के कामकाज में दखल देने और उन्हें सुधारने की धमकी दे रहे हैं। यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है जब मंत्री और विधायक थाने के प्रभारी जैसे अधिकारियों को भी धमकाते हुए नजर आते हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर विधायकों और मंत्रियों ने अधिकारियों के तबादले करने का दबाव डाला था, लेकिन मुख्यमंत्री ने किसी को भी तबादला करने का अधिकार नहीं दिया। इसके बावजूद मंत्री और विधायक यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि यदि अधिकारी उनके कहने पर तबादला नहीं कर सकते तो उन्हें निलंबित कर दिया जाए।
मुख्यमंत्री की स्थिति:
इस स्थिति में अधिकारियों के लिए काम करना कठिन हो गया है
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंत्री और विधायकों की इस मांग को नकारते हुए उनके द्वारा अधिकारियों के तबादले करने के अधिकार को अस्वीकार कर दिया। इसके बावजूद मंत्री और विधायक यह कह रहे हैं कि वे अधिकारियों के तबादले करने के लिए हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं और अब उन्हें निलंबित करने की आवश्यकता है। इस स्थिति में अधिकारियों के लिए काम करना कठिन हो गया है, क्योंकि उन्हें लगातार मंत्री और विधायकों के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
मंत्रियों और अधिकारियों के रिश्ते:
तीन मंत्रियों ने शपथ लेने के तुरंत बाद पांच अधिकारियों के तबादले कराए थे,
एक महीने बाद वही अधिकारी उसी विभाग में वापस लौट आए।
हरियाणा के तीन मंत्रियों ने शपथ लेने के तुरंत बाद पांच अधिकारियों के तबादले कराए थे, लेकिन एक महीने बाद वही अधिकारी उसी विभाग में वापस लौट आए। इस मामले ने यह सवाल उठाया है कि क्या मंत्रियों और अधिकारियों के बीच अच्छे रिश्ते हैं, या फिर अधिकारियों का प्रभाव मंत्रियों से अधिक है? ऐसा माना जा रहा है कि अधिकारी मंत्रियों से अधिक ताकतवर हैं और इसलिए मंत्रियों की कोई भी कार्रवाई अधिकारियों के खिलाफ नाकाम हो रही है।
मनोहर लाल खट्टर का प्रभाव:
मनोहर लाल खट्टर का केंद्रीय प्रभाव अब भी राज्य सरकार के निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अन्य फैसलों के मामले में उनका इशारा सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का प्रभाव भले ही राज्य में हो, लेकिन मनोहर लाल खट्टर का केंद्रीय प्रभाव अब भी राज्य सरकार के निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मनोहर लाल खट्टर का कार्यालय हरियाणा में कई महत्वपूर्ण फैसले करता है और राज्य में अधिकारियों के तबादले, परियोजनाओं और अन्य फैसलों के मामले में उनका इशारा सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। खट्टर की मजबूत पकड़ के कारण उनके समर्थक अधिकारी चंडीगढ़ और मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात हैं, और यह भी माना जा रहा है कि खट्टर की उपस्थिति राज्य में मंत्री और विधायकों को प्रभावित करती है।
आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का केंद्रीय इरादा:
ताकि उन्हें हरियाणा में मंत्री और विधायकों के दबाव से छुटकारा मिल सके।
हरियाणा में कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारी अब केंद्रीय सरकार में स्थानांतरण की योजना बना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह अधिकारी राज्य सरकार से असंतुष्ट हो चुके हैं और अब वे केंद्र में अपनी सेवा देने के लिए तैयार हो रहे हैं, ताकि उन्हें हरियाणा में मंत्री और विधायकों के दबाव से छुटकारा मिल सके।
इन अधिकारियों का मानना है कि हरियाणा में मंत्री और विधायक अधिकारियों के सामने बेजा दबाव डालते हैं, जिससे उनके कार्य करने के तरीके पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसे अधिकारियों का कहना है कि वे अब राज्य में काम करने के लिए तैयार नहीं हैं, और इसलिए वे केंद्रीय प्रशासन में अपने स्थानांतरण के लिए तैयार हो रहे हैं।
निचले स्तर के अधिकारी भी परेशान:
निचले स्तर के अधिकारी भी अब परेशान हो चुके हैं और वे ऐसे विभागों में स्थानांतरण चाहते हैं, जहां उन्हें मंत्री और विधायकों के हस्तक्षेप से छुटकारा मिल सके। इन अधिकारियों का कहना है कि वे किसी ऐसे विभाग में काम करना चाहते हैं, जहां कोई बाहरी दबाव न हो और वे अपनी कार्यप्रणाली को स्वतंत्र रूप से चला सकें।
ल्कि राज्य के प्रशासनिक कामकाज में भी बाधाएं उत्पन्न कर रही हैं।
हरियाणा सरकार के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।
हरियाणा में वर्तमान समय में मंत्री और विधायकों के दबाव और अधिकारियों की कार्यशैली पर असर डालने की यह स्थिति सत्ता में सत्ता की जंग का रूप ले चुकी है। यह स्थिति ना केवल अधिकारियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है, बल्कि राज्य के प्रशासनिक कामकाज में भी बाधाएं उत्पन्न कर रही हैं। यदि यह स्थिति इसी तरह बढ़ती रही, तो यह आने वाले समय में हरियाणा सरकार के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।
क्या यह स्थिति आगे सुधार की ओर जाएगी, या फिर अधिकारी और मंत्री के बीच का यह टकराव और बढ़ेगा?